पोखरण-1 की 51वीं वर्षगांठ: जब भारत ने रच दिया था इतिहास, गूंज उठा था “Smiling Buddha” का पराक्रम

नई दिल्ली: आज 18 मई का दिन भारतीय इतिहास में उस असाधारण पल की याद दिलाता है जब देश ने दुनिया को यह दिखा दिया कि वैज्ञानिक कौशल और राजनीतिक इच्छाशक्ति के दम पर कोई भी राष्ट्र आत्मनिर्भर बन सकता है। वर्ष 1974 में, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भारत ने राजस्थान के रेगिस्तान में पोखरण की भूमि पर अपना पहला भूमिगत परमाणु परीक्षण कर ‘स्माइलिंग बुद्धा’ नाम से इतिहास रच दिया। यह सिर्फ एक विस्फोट नहीं था, बल्कि यह भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता, तकनीकी क्षमता और वैश्विक दबावों को दरकिनार करने वाले आत्मबल का प्रतीक था।

अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन और चीन जैसे परमाणु शक्तियों से अलग हटकर भारत ने वैज्ञानिकों की एक समर्पित टीम के बल पर गुप्त रूप से यह मिशन सफल किया, जिसमें सात वर्षों तक दिन-रात काम करने वाले 75 वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने राष्ट्र के लिए अभूतपूर्व मिसाल कायम की। आज इस स्वर्णिम उपलब्धि की 51वीं वर्षगांठ पर कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के अद्वितीय नेतृत्व को नमन करते हुए उन्हें ‘साहसी लौह महिला’ बताया और इस उपलब्धि को भारत की वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता का शिखर कहा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे वैज्ञानिकों की लगन और देशभक्ति का परिणाम बताया, जबकि राहुल गांधी ने इस परीक्षण को संभव बनाने वाले हर वैज्ञानिक और शोधकर्ता का आभार जताया।

इस मिशन ने भारत को वैश्विक स्तर पर छठवें परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र के रूप में स्थापित किया और यह दिखा दिया कि भारत केवल विचारों का देश नहीं, बल्कि साहस, विज्ञान और संकल्प की जमीन भी है। आज जब हम ‘स्माइलिंग बुद्धा’ की 51वीं वर्षगांठ मना रहे हैं, तो यह अवसर न केवल एक तकनीकी विजय का उत्सव है, बल्कि राष्ट्रीय गौरव, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता की उस प्रेरणा का भी स्मरण है जिसने भारत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।

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