पटना: लड़कियों के खिलाफ बढ़ती डिजिटल हिंसा को रोकने के लिए महिला एवं बाल विकास निगम, बिहार और सहयोगी संस्था ने 16 दिवसीय लैंगिक हिंसा उन्मूलन अभियान के तहत खासपुर पंचायत के छितनावा उच्च माध्यमिक विद्यालय में जेंडर संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में नौवीं से बारहवीं तक की 90 किशोरियाँ और 20 किशोरों सहित कुल 110 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। मुख्य फोकस रहा – साइबर स्टॉकिंग, डीपफेक वीडियो, फेक अकाउंट, निजी फोटो का दुरुपयोग, ऑनलाइन ब्लैकमेल और यौन उत्पीड़न जैसी डिजिटल हिंसा से बचाव के तरीके सिखाना और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार विकसित करना।
कार्यक्रम में बताया गया कि इंटरनेट जितना फायदेमंद है, उतना ही खतरनाक भी हो सकता है, खासकर लड़कियों के लिए। जिला प्रबंधक निशा कुमारी ने कहा, “कानून और तकनीक के साथ-साथ घर-परिवार और स्कूल में डिजिटल अनुशासन सिखाना सबसे जरूरी है। सामुदायिक जागरूकता के बिना यह लड़ाई अधूरी रहेगी।” एमटीएस अभिषेक कुमार ने जोर दिया कि तेजी से बदलते ऑनलाइन अपराधों के तरीकों को देखते हुए डिजिटल सुरक्षा को पाठ्यक्रम का स्थायी हिस्सा बनाना चाहिए।
छात्राओं ने खुलकर अपनी बात रखी। पायल कुमारी ने कहा, “पहले नहीं पता था कि कोई हमारी फोटो लेकर कितना नुकसान पहुंचा सकता है; आज समझ आया कि सुरक्षा सबसे पहले हमारी अपनी जिम्मेदारी है।” राखी कुमारी और पिंकी कुमारी ने भी इसे “आँखें खोलने वाला अनुभव” बताया। स्कूल प्रिंसिपल राजेश कुमार राजन ने इसे छात्र सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया, जबकि शिक्षक भास्कर सिंह ने पुरुषों की जागरूकता पर जोर दिया। शिक्षिका टीनू कुमारी और विक्रांत कुमार ने कहा कि लैंगिक समानता और डिजिटल सुरक्षा दोनों के लिए समाज को एकजुट होना होगा।
सहयोगी संस्था की कार्यकारी निदेशक रजनी ने कहा, “तकनीक तेजी से बदल रही है, इसलिए किशोरियों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार सिखाना और समुदाय को संवेदनशील बनाना हमारा लक्ष्य है। निरंतर संवाद ही बदलाव की बुनियाद है।” कार्यक्रम को सफल बनाने में खुशबू, मोनिका, लाजवंती, फरहीन, प्रियंका, शारदा, निर्मला, बिंदु, उषा और मनोज ने अहम भूमिका निभाई।

