पूर्णिया: केंद्रीय बजट 2026 को लेकर पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने इस बजट को जनता के साथ धोखा बताते हुए कहा कि इस बजट में पूर्णिया समेत सीमांचल और कोसी का नाम तक नहीं लय गया। यह बजट न तो आम लोगों की जरूरतों को समझता है और न ही देश को कोई नई दिशा देता है। सांसद ने स्पष्ट कहा कि यह बजट केवल रिपीटेशन और रीसाइक्लिंग का उदाहरण है, जिसमें पुराने वादों को दोहराने के अलावा कुछ भी नया नहीं है।
सांसद पप्पू यादव ने खास तौर पर सीमांचल और कोसी क्षेत्र की अनदेखी को गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि पूरे बजट भाषण में सीमांचल और कोसी जैसे शब्दों का नाम तक नहीं लिया गया, जबकि सरकार ने चुनाव के समय इन क्षेत्रों के विकास के बड़े-बड़े वादे किए थे। उन्होंने कहा कि पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज जैसे सीमांचल जिलों और कोसी क्षेत्र की समस्याएँ—बाढ़, गरीबी, बेरोजगारी और पिछड़ापन—पूरी तरह नजरअंदाज कर दी गईं, जिससे साफ है कि बिहार को एक बार फिर धोखा मिला है।
पप्पू यादव ने कहा कि 2026 का बजट यह साफ संदेश देता है कि अब गांव, किसान और खेती सरकार की प्राथमिकताओं से बाहर हो चुके हैं। यह पहला ऐसा बजट है जिसमें किसान शब्द तक का उल्लेख नहीं है—न सिंचाई की बात, न खाद की, न खेतिहर मजदूरों की। सीमांचल और कोसी जैसे कृषि प्रधान क्षेत्रों के लिए यह बजट पूरी तरह निराशाजनक है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की हालत और बदतर होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा।
सांसद ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 11 साल पहले शिक्षा का बजट कुल बजट का 4.5 प्रतिशत था, जिसे घटाकर 2.5 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं उच्च शिक्षा का बजट 2.5 प्रतिशत से गिरकर सिर्फ 0.9 प्रतिशत रह गया है। उन्होंने कहा कि यह बजट गरीब छात्रों, युवाओं और महिलाओं पर बोझ डालने वाला है। न इनकम टैक्स में कोई राहत दी गई, न रोजगार सृजन की कोई ठोस योजना सामने आई।
पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि यह बजट पूंजीपति और उद्योगपतियों के हित में तैयार किया गया है, जबकि आम जनता की समस्याओं को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने कहा कि बजट की घोषणा के बाद शेयर बाजार का गिरना इस बात का संकेत है कि सरकार हर क्षेत्र में विफल रही है। महंगाई कैसे कम होगी और रोजगार कैसे पैदा होंगे—इस पर बजट पूरी तरह मौन है। सांसद ने कहा कि सीमांचल, कोसी और पूरे बिहार की जनता इस बजट से खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है।



