कौशल विकास योजनाओं में भारी अनियमितताओं पर सांसद पप्पू यादव का सरकार पर तीखा हमला

पूर्णिया: पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय से जुड़े अतारांकित प्रश्न संख्या–301 के उत्तर पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपने ही उत्तर में यह स्वीकार कर लिया है कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY), डीडीयू–जीकेवाई और एनएसडीसी से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर खामियां रही हैं, लेकिन इसके बावजूद हजारों करोड़ रुपये के कथित दुरुपयोग पर सीबीआई जांच से साफ बचा जा रहा है। पप्पू यादव ने कहा कि निजी प्रशिक्षण साझेदारों के माध्यम से चल रही इन योजनाओं में फर्जी प्रशिक्षण, कागजी केंद्र, फर्जी प्लेसमेंट और कमीशनखोरी की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग 10,000 करोड़ रुपये के दुरुपयोग की आशंका को सरकार ने सीधे खारिज करने के बजाय केवल “आईटी नियंत्रणों की सीमाएं” और “विकेन्द्रीकृत व्यवस्था” जैसे बहाने गिनाए हैं, जो अपने आप में गंभीर लापरवाही का प्रमाण है। सांसद पप्पू यादव के अनुसार, सीएजी की रिपोर्ट में जिन खामियों को उजागर किया गया है, वे मामूली तकनीकी त्रुटियां नहीं बल्कि संगठित स्तर पर हुए भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सार्वजनिक धन का इतना बड़ा हिस्सा संदिग्ध तरीके से खर्च हुआ है, तो सरकार सीबीआई या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने से क्यों डर रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अब पीएमकेवीवाई 4.0 के नाम पर आधार, फेस रिकग्निशन, जियो-टैगिंग और डिजिटल डैशबोर्ड जैसे सुधारों की बात कर रही है, लेकिन इससे पहले हुए घोटालों की जवाबदेही तय किए बिना केवल नई तकनीक का ढोल पीटना जनता को गुमराह करने जैसा है। पप्पू यादव ने स्पष्ट किया कि कौशल विकास जैसी योजनाएं गरीब, बेरोजगार और ग्रामीण युवाओं के भविष्य से जुड़ी हैं। अगर इन्हीं योजनाओं में लूट और फर्जीवाड़ा होगा, तो युवाओं का सरकार से भरोसा पूरी तरह खत्म हो जाएगा। उन्होंने दोहराया कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष सीबीआई जांच होनी चाहिए और दोषी अधिकारियों व निजी प्रशिक्षण एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि देश के युवाओं के साथ हो रहे इस अन्याय पर रोक लग सके।

वहीं, लोकसभा में कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय से जुड़े सांसद पप्पू यादव के अतारांकित प्रश्न संख्या–301 के उत्तर में केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयन्त चौधरी ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार “स्किल इंडिया मिशन” के तहत देशभर में युवाओं के लिए व्यापक स्तर पर कौशल विकास, पुनःकौशल विकास और उन्नत कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित कर रही है। मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) मंत्रालय की प्रमुख योजना है, जिसे वर्ष 2015 से लागू किया जा रहा है। इसके तहत अल्पकालिक प्रशिक्षण (STT) और पूर्व शिक्षा की मान्यता (RPL) के माध्यम से युवाओं को रोजगारोन्मुख कौशल प्रदान किया जाता है।

पीएमकेवीवाई 4.0 के दिशानिर्देशों के अनुसार प्रशिक्षण औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई), प्रधानमंत्री कौशल केंद्रों, स्कूलों, कॉलेजों, उच्च शिक्षण संस्थानों, अन्य मंत्रालयों के प्रशिक्षण केंद्रों, उद्योग भागीदारों और निजी प्रशिक्षण प्रदाताओं के माध्यम से दिया जा रहा है। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) को मंत्रालय की कार्यान्वयन एजेंसी बताया गया। उन्होंने आगे कहा कि ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) संचालित की जा रही है, जिसका उद्देश्य 15 से 35 वर्ष आयु वर्ग के ग्रामीण गरीब युवाओं को रोजगारोन्मुख कौशल प्रदान करना है। यह योजना परियोजना मोड में विभिन्न पात्र संस्थाओं और परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों (PIA) के माध्यम से लागू की जाती है, जिससे युवाओं को न्यूनतम मजदूरी के बराबर या उससे अधिक वेतन वाली नौकरियां मिल सकें।

कौशल विकास योजनाओं में कथित 10,000 करोड़ रुपये के दुरुपयोग के आरोपों पर मंत्री ने कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा पीएमकेवीवाई की निष्पादन लेखापरीक्षा की गई है। इस लेखापरीक्षा में प्रारंभिक चरण से लेकर वर्ष 2022 तक की अवधि के दौरान डेटा सत्यापन, लाभार्थी विवरण, मूल्यांकनकर्ताओं की जानकारी और निगरानी प्रणालियों में कुछ कमियां सामने आई थीं। मंत्री के अनुसार, ये कमियां मुख्य रूप से आईटी नियंत्रणों की सीमाओं और उस समय लागू विकेन्द्रीकृत कार्यान्वयन प्रणाली के कारण थीं।

श्री जयन्त चौधरी ने सदन को बताया कि सीएजी की टिप्पणियों को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने पीएमकेवीवाई 4.0 के तहत कई सुधारात्मक कदम उठाए हैं। इनमें आधार आधारित ई-केवाईसी, फेस रिकग्निशन और जियो-टैग उपस्थिति प्रणाली, क्यूआर-कोड युक्त डिजिटल प्रमाणपत्र, स्किल इंडिया डिजिटल हब पर रियल-टाइम डैशबोर्ड, एनसीवीईटी के माध्यम से प्रशिक्षण केंद्रों और मूल्यांकनकर्ताओं की मान्यता को मजबूत करना तथा स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था शामिल है।

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