कौन हैं सी सदानंदन मास्टर? राज्यसभा में अपने कृत्रिम पैर रखकर क्यों दिया लोकतंत्र का संदेश

नई दिल्ली: राज्यसभा में सोमवार को उस वक्त असाधारण दृश्य देखने को मिला, जब बीजेपी सांसद सी सदानंदन मास्टर ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान सदन की मेज पर अपने कृत्रिम पैर रख दिए। उनका यह कदम केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि एक गहरे राजनीतिक और सामाजिक संदेश से जुड़ा हुआ था। सदन को संबोधित करते हुए सदानंदन मास्टर ने कहा कि वह देश को यह दिखाना चाहते हैं कि लोकतंत्र की असली कीमत क्या होती है और इसे किस तरह की कुर्बानियों से सींचा जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि 31 साल पहले उन पर हमला करने वाले वही लोग हैं, जो आज लोकतंत्र की रक्षा का दावा कर रहे हैं।

सी सदानंदन मास्टर ने सदन में बताया कि 25 जनवरी 1994 को जब वह अपने घर लौट रहे थे, तब कन्नूर जिले में उन पर संगठित तरीके से हमला किया गया। हमलावरों ने उन्हें पीछे से पकड़कर सड़क पर गिराया और ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारे लगाते हुए उनके दोनों पैर काट दिए। उन्होंने इस हमले के लिए माकपा के कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया। उनके इस बयान पर वाम दलों के सांसदों ने कड़ा विरोध जताया, जिससे सदन में कुछ समय के लिए हंगामे की स्थिति भी बन गई।

सी सदानंदन मास्टर मूल रूप से केरल के त्रिशूर जिले के रहने वाले हैं और पेशे से शिक्षक रहे हैं। उन्होंने असम के गुवाहाटी विश्वविद्यालय से बीकॉम और केरल के कालीकट विश्वविद्यालय से बीएड की पढ़ाई की। वर्ष 1999 से वे पेरामंगलम स्थित श्री दुर्गा विलासम हायर सेकेंडरी स्कूल में सामाजिक विज्ञान पढ़ा रहे थे। शिक्षा के क्षेत्र के साथ-साथ वे केरल में नेशनल टीचर्स यूनियन के उपाध्यक्ष भी रहे हैं, जिससे उनकी पहचान एक शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में बनी।

राजनीतिक सफर की बात करें तो सदानंदन मास्टर के शुरुआती दिन वामपंथी राजनीति से जुड़े रहे। कॉलेज के दिनों में वे माकपा के छात्र संगठन स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के सदस्य थे, लेकिन 1984 में उन्होंने एसएफआई छोड़कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दामन थाम लिया। इसके बाद वे संघ के सक्रिय कार्यकर्ता बने और कन्नूर जिले में संगठनात्मक जिम्मेदारियां भी संभालीं। बाद में वे बीजेपी में शामिल हुए और पार्टी ने उन्हें 2016 और 2021 के केरल विधानसभा चुनावों में कूत्तुपरम्बा सीट से उम्मीदवार बनाया, हालांकि दोनों ही बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा और वे तीसरे स्थान पर रहे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जुलाई 2025 में सी सदानंदन मास्टर को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया। उनके साथ उज्ज्वल देवराव निकम, हर्षवर्धन सिंगला और इतिहासकार मिनाक्षी जैन को भी उच्च सदन में जगह दी गई थी। मनोनयन के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदानंदन मास्टर के जीवन को साहस, अन्याय के खिलाफ संघर्ष और राष्ट्रनिर्माण के प्रति अडिग संकल्प का प्रतीक बताया था।

राज्यसभा की वेबसाइट के अनुसार, सी सदानंदन मास्टर शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों से जुड़ी संसदीय समिति के सदस्य हैं। सोमवार को वे पहली बार किसी बड़ी चर्चा में बोले। अपने कृत्रिम पैर सदन की मेज पर रखकर उन्होंने न केवल अपने निजी संघर्ष को सामने रखा, बल्कि यह भी जताया कि राजनीतिक हिंसा और भय के बावजूद लोकतंत्र में अपनी बात रखने का साहस ही असली लोकतांत्रिक मूल्य है।

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