नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के 75 साल के इतिहास में पहली बार किसी बैठे हुए मुख्यमंत्री ने वकील की तरह केस की बहस की है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बुधवार को बंगाल में विशेष गहन सत्यापन (SIR) मामले में सुप्रीम कोर्ट में वकीलों की कतार में सबसे आगे बैठीं और खुद दलीलें पेश कीं। इस दौरान उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा की अपील की और कहा कि उनके राज्य के मतदाताओं को न्याय नहीं मिल रहा है। मामला बंगाल में मतदाता सूची के विशेष सत्यापन (SIR) से जुड़ा है, जिसमें ममता बनर्जी का आरोप है कि कई नाम गलत तरीके से हटाए जा रहे हैं, खासकर महिलाओं के नाम जो शादी के बाद ससुराल चली गईं लेकिन मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए।
ममता ने कहा, “मैं सामान्य परिवार से हूं, लेकिन अपनी पार्टी और लोगों के लिए लड़ रही हूं। हमें इंसाफ नहीं मिल रहा। कोई हमारे सवालों का जवाब नहीं दे रहा।” सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा, “आपने बहुत अच्छा वकील चुना है, उन्हें बहस करने दीजिए।” इस पर ममता ने हाथ जोड़कर कहा, “सेव डैमोक्रेसी” (लोकतंत्र बचाइए)। जब ममता ने 5 मिनट बोलने की मांग की, तो CJI ने कहा, “कोई दिक्कत नहीं, हम 15 मिनट देंगे, लेकिन पहले हमारी बात सुन लीजिए।” CJI ने आश्वासन दिया कि समस्या का समाधान निकाला जाएगा, राज्य सरकार और पार्टी के वकील (कपिल सिब्बल, गोपाल शंकरनारायणन आदि) मौजूद हैं, और मुद्दा रिकॉर्ड पर है।
ममता ने कहा कि 6 बार चुनाव आयोग को पत्र लिखा गया, लेकिन एक भी जवाब नहीं मिला। “न्याय कहीं पिछले दरवाजे पर अटक गया है।” उन्होंने कुछ तस्वीरें और अखबारों की कटिंग्स दिखाने की इच्छा जताई और कहा कि भाषा या वर्तनी के अंतर से किसी को मतदाता सूची से बाहर नहीं किया जाना चाहिए। यह घटना ऐतिहासिक है क्योंकि इससे पहले कई मुख्यमंत्री सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए थे, लेकिन किसी ने खुद बहस नहीं की थी। ममता बनर्जी ने न केवल केस की पैरवी की, बल्कि सीधे जजों से संवाद किया, जिसे कोर्ट ने गंभीरता से सुना। अब कोर्ट इस मामले में आगे की सुनवाई करेगा और समाधान की दिशा में कदम उठाएगा।



