भागलपुर: बिहार बजट 2026-27 ने कृषि को आधुनिक, तकनीक-संचालित और बाजारोन्मुख बनाने का स्पष्ट रोडमैप पेश किया है, जिसमें डिजिटल कृषि निदेशालय की स्थापना प्रमुख घोषणा है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर इस मिशन में अहम भूमिका निभा रहा है—‘ई-निरोग’ ऐप से फसलों की बीमारियों की पहचान और त्वरित परामर्श मिल रहा है, जबकि एफएम ग्रीन कम्युनिटी रेडियो और सोशल मीडिया से मौसम-कृषि सलाह प्रसारित हो रही है।
बजट में 54-55 उत्पादों (जैसे लिट्टी-चोखा, ठेकुआ, मालदा आम, सोनाचूर चावल, तिलकुट-अनरसा, खोआ पेड़ा आदि) के लिए जीआई टैग पर तेज काम चल रहा है, जिससे ब्रांडिंग, गुणवत्ता और निर्यात बढ़ेगा तथा किसानों की आय में वृद्धि होगी। ‘साबाग्रिस’ इनक्यूबेटर ने 133 कृषि स्टार्टअप को सहयोग दिया, जिनमें से 71 को 831 लाख रुपये अनुदान मिला, और त्रिस्तरीय मॉडल से नवाचारों को व्यावसायिक रूप दिया जा रहा है।
मंडियों का आधुनिकीकरण, ई-नाम से जुड़ाव, ग्रेडिंग-पैकेजिंग-भंडारण में सहयोग, 37 करोड़ की राष्ट्रीय मृदा मानचित्रण परियोजना से एआई-आधारित मिट्टी मानचित्र, और कृषि सूचना विज्ञान एवं एआई केंद्र से ड्रोन-आईओटी-आईसीटी प्रशिक्षण जैसी पहलों से बिहार की खेती डिजिटल, जलवायु-सहिष्णु और बाजारोन्मुख बनेगी, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी और जोखिम कम होगा।



