पश्चिमी चंपारण: चम्पारण के बगहा से जनसुराज पार्टी के संस्थापक एवं प्रमुख प्रशांत किशोर ने बिहार नवनिर्माण अभियान की भव्य शुरुआत की, जो राज्य की राजनीति में उनकी सक्रिय भूमिका का मजबूत संकेत है। यह वही बगहा है, जहां से उन्होंने पहले भी अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत की थी, और अब एक बार फिर इसी ऐतिहासिक धरती से नए अभियान का आगाज होने पर जनसुराज के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। बगहा शहर स्थित आईबी गेस्ट हाउस में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में प्रशांत किशोर ने मौजूदा डबल इंजन एनडीए सरकार पर जमकर हमला बोला और कहा कि जनसुराज ने बिहार में शिक्षा, नौकरी और बुनियादी सुविधाओं जैसे असली मुद्दों को उठाया, लेकिन सरकार ने महिलाओं को 10 हजार रुपये देकर उन्हें बहला-फुसलाने का काम किया और उसी के सहारे उनका विश्वास जीत लिया।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब सभी महिलाओं को दो-दो लाख रुपये देने की बारी है, जिसका लोगों को बेसब्री से इंतजार है, लेकिन जनता अब खोखले वादों और अल्पकालिक राहत से आगे बढ़कर स्थायी समाधान चाहती है, जो केवल व्यवस्था में गहरा बदलाव लाकर ही संभव है। प्रशांत किशोर ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार की जनता अब जागरूक हो चुकी है और वह केवल लुभावने वादों से नहीं, बल्कि ठोस नीतियों, शिक्षा-स्वास्थ्य-रोजगार और पारदर्शी शासन से संतुष्ट होगी। इस मौके पर जनसुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती, एमएलसी आफाक अहमद, राज्य कार्यकारिणी सदस्य कामरान अजीज, बगहा विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी नंदेश उर्फ चुन्नू पांडेय सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे और उन्होंने अभियान को सफल बनाने का संकल्प लिया।
यह रैली और अभियान न केवल जनसुराज की जमीनी तैयारी को दर्शाता है, बल्कि 2025 के विधानसभा चुनावों में पार्टी की मजबूत वापसी की रणनीति का भी हिस्सा माना जा रहा है, जहां बगहा जैसे ऐतिहासिक स्थल से शुरूआत करके पश्चिम चम्पारण और पूरे बिहार में संगठन को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशांत किशोर ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे जनता के बीच जाकर बिहार की असली समस्याओं को उठाएं और लोगों को यह विश्वास दिलाएं कि जनसुराज केवल राजनीतिक दल नहीं, बल्कि बिहार के पुनर्निर्माण का आंदोलन है। कार्यक्रम में मौजूद कार्यकर्ताओं ने नारे लगाते हुए कहा कि अब बिहार में बदलाव का समय आ गया है और जनसुराज इस बदलाव का माध्यम बनेगी। यह शुरुआत राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा करने वाली साबित हो सकती है, खासकर जब सपा, भाजपा और अन्य दल भी 2025 चुनावों की तैयारियों में जुटे हैं।



