रायपुर: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए माओवाद को पूरी तरह विनाशकारी विचारधारा करार दिया और कहा कि “माओवाद ने किसी भी समाज को कभी लाभ नहीं पहुंचाया, जहां भी यह फैला वहां केवल तबाही मचाई”। उन्होंने कोलंबिया, पेरू और कंबोडिया जैसे देशों के उदाहरण देते हुए कहा कि माओवादी विचारधारा विकास की कमी या कानून-व्यवस्था की समस्या से नहीं जुड़ी है, बल्कि यह हिंसा को बढ़ावा देने वाली विचारधारा है जो विकास को रोकती है और लोगों को अंधेरे में धकेलती है। शाह ने कहा कि जहां कम्युनिस्ट सत्ता में रहे, वहां विकास नहीं हुआ और जहां कल्याण का वादा किया गया, वहां आदिवासियों को हथियार थमाकर अंधकार फैलाया गया।
उन्होंने माओवाद को “विनाश का प्रतीक” बताते हुए देश से इस विचारधारा को जल्द से जल्द खत्म करने की अपील की और कहा कि कम्युनिस्ट विचारधारा अब लोकतांत्रिक राजनीति में लगभग खत्म हो चुकी है। शाह ने माओवादियों से हथियार छोड़कर मुख्यधारा में आने की अपील की और कहा कि सरकार एक भी गोली नहीं चलाना चाहती, बल्कि आत्मसमर्पण करने वालों का “लाल कालीन” बिछाकर स्वागत करेगी। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार की माओवादी पुनर्वास नीति को सबसे आकर्षक बताते हुए कहा कि यह नीति आत्मसमर्पण करने वालों को सम्मानजनक जीवन देती है।
गृह मंत्री ने दावा किया कि सुरक्षा-केंद्रित रणनीति, बुनियादी ढांचे का विकास, माओवादी वित्तीय नेटवर्क पर प्रहार और आत्मसमर्पण नीति के कारण नक्सलवाद अब अंतिम चरण में है और मार्च 2026 तक देश से पूरी तरह खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि नक्सल समस्या विकास की कमी से नहीं जुड़ी है, बल्कि यह एक वैचारिक समस्या है जो हिंसा को बढ़ावा देती है। शाह ने कम्युनिस्ट पार्टियों को केवल केरल तक सीमित बताते हुए उनकी राजनीतिक प्रासंगिकता खत्म होने का संकेत दिया। यह बयान ऐसे समय में आया है जब छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान तेज हो गया है और सरकार ने नक्सलवाद उन्मूलन के लिए मार्च 2026 की समयसीमा तय की है।



