पूर्व विधायक जननेता संजीव झा की तीसरी पुण्यतिथि समारोहपूर्वक आयोजित

सहरसा, अजय कुमार: जिला परिषद स्थित पूजा बैंक्वेट में सोमवार को पूर्व विधायक व जननेता स्व. संजीव झा की तीसरी पुण्यतिथि संजीव झा विचार मंच के पत्रकार आलोक झा की अध्यक्षता और बजरंग गुप्ता के संचालन में सोमवार को समारोहपूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में राजनीतिक, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी वर्ग के लोग और उनके समर्थक मौजूद रहे। मौके पर वक्ताओं ने स्व संजीव झा के राजनीतिक और सामाजिक जीवन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उनके विचारों और संघर्षों से प्रेरणा लेने की अपील की। कार्यक्रम की शुरुआत सभागार में मौजूद सभी लोगों द्वारा दो मिनट का मौन धारण कर की गई। इसके बाद स्व संजीव झा के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।

पूरा सभागार संजीव झा अमर रहें के नारों से गूंज उठा। श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान उनके संघर्षशील जीवन की झलकियां लोगों को भावुक करती नजर आईं। कार्यक्रम में मौजूद नगर निगम की महापौर बेनप्रिया संजीव झा ने अपने संबोधन में कहा कि आज का यह दिन मेरे लिए ही नहीं, बल्कि पूरे सहरसा के लिए भावनाओं से भरा हुआ है। स्वर्गीय संजीव झा जी केवल मेरे जीवनसाथी नहीं थे। वे इस मिट्टी के सच्चे सेवक, गरीबों की आवाज़ और जन-जन के अपने नेता थे। आप सभी का यहाँ आकर उन्हें श्रद्धांजलि देना, हमारे परिवार के लिए संबल है। मैं हृदय से आप सभी की आभारी हूँ।वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि स्व. संजीव झा केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि जनता के सच्चे सेवक थे। उन्होंने हमेशा समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के हक और अधिकार की लड़ाई लड़ी। सत्ता उनके लिए साधन थी, उद्देश्य नहीं। आज के युवाओं को उनके जीवन से ईमानदारी, संघर्ष और सेवा की सीख लेनी चाहिए।

वही कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एक पूर्व सहयोगी ने कहा कि स्व झा का पूरा जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। क्षेत्र के विकास,शिक्षा,स्वास्थ्य और गरीबों की आवाज बुलंद करने में उनकी भूमिका हमेशा याद की जाएगी। उन्होंने कहा कि राजनीति में स्व. झा की सादगी और स्पष्टवादिता उन्हें अलग पहचान दिलाती थी। वहीं, एक युवा वक्ता ने कहा कि स्व. संजीव झा युवाओं के प्रेरणास्रोत थे। वे हमेशा कहते थे कि राजनीति को सेवा का माध्यम बनाना चाहिए, न कि व्यक्तिगत लाभ का। आज जब राजनीति में विश्वास की कमी महसूस की जाती है, ऐसे समय में स्व. झा जैसे नेताओं की कमी और अधिक खलती है। पुण्यतिथि के अवसर पर सभागार में एक चित्रकला प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया, जो लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही।

प्रदर्शनी में बच्चों और युवाओं द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स में सामाजिक सरोकार, लोकतंत्र, संघर्ष और जनसेवा के विषयों को उकेरा गया था। प्रतिभागियों की कलाकृतियों ने स्व. संजीव झा के विचारों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के अंतिम चरण में पुण्यतिथि के मौके पर आयोजित विभिन्न दौरों और प्रतियोगिताओं में शामिल प्रतिभागियों को शील्ड और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। सम्मान पाकर प्रतिभागियों के चेहरे पर उत्साह और गर्व साफ झलक रहा था।कार्यक्रम के दौरान स्वरांजलि के प्रो गौतम सिंह के नेतृत्व में सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम के आयोजकों ने कहा कि हर वर्ष इस पुण्यतिथि को प्रेरणा दिवस के रूप में मनाया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ी स्व. संजीव झा के विचारों और संघर्षों से परिचित हो सके।

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