राज्य में टीबी से मृत्यु दर में रिकॉर्ड गिरावट, ट्रीटमेंट की 87 प्रतिशत सफलता दर ने पेश की मिसाल

  • मृत्यु दर न्यूनतम स्तर 2.1 प्रतिशत पर पहुंचा
  • बक्सर, सहरसा, भागलपुर, सीतामढ़ी, लखीसराय जिलों के इलाज की औसत सफलता दर राज्य से भी बेहतर

पटना: बिहार में टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) के खिलाफ चल रहे महाभियान के बेहद सुखद और उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। हालिया आंकड़ों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और समय पर सटीक उपचार से इस जानलेवा बीमारी पर लगाम कसने में बड़ी सफलता मिली है। इस पूरे अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि टीबी से होने वाली मौतों के ग्राफ में आई निरंतर गिरावट और इलाज की सफलता दर में राज्य का शानदार प्रदर्शन है।

मृत्यु दर में आई ऐतिहासिक कमी
पिछले पांच वर्षों के रुझान को देखें तो टीबी के कारण होने वाली मृत्यु दर में एक बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। साल 2021 में जहाँ मृत्यु दर अपने उच्चतम स्तर 3.7 प्रतिशत पर थी, वहीं विभाग के निरंतर प्रयासों और बेहतर निगरानी तंत्र के चलते साल 2024 तक यह घटकर मात्र 2.1 प्रतिशत रह गई है। यह लगभग 43% की गिरावट दर्शाती है कि अब मरीजों को न केवल समय पर दवा मिल रही है, बल्कि गंभीर स्थिति में भी उनकी जान बचाना संभव हो पा रहा है।

बिहार की औसत सफलता दर और अग्रणी जिले
राज्य स्तर पर ड्रग-सेंसिटिव टीबी के इलाज की औसत सफलता दर अब 86.9 प्रतिशत (लगभग 87%) तक पहुँच गई है। जिलावार विश्लेषण से पता चलता है कि बक्सर, सहरसा, भागलपुर, लखीसराय और सीतामढ़ी जैसे जिले राज्य के औसत से भी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं और सफलता की नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। मुजफ्फरपुर, वैशाली और दरभंगा जैसे महत्वपूर्ण जिलों ने भी इस औसत को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इलाज की बढ़ती प्रभावशीलता
मृत्यु दर में आई इस कमी का सीधा संबंध मरीजों के इलाज की सफलता दर में हुई उल्लेखनीय बढ़ोतरी से है। साल 2020 में जहाँ यह दर 80 प्रतिशत थी, वहीं 2024 में बिहार का औसत 86.9 प्रतिशत होना यह प्रमाणित करता है कि स्वास्थ्य विभाग का निगरानी तंत्र अब पहले से कहीं अधिक मजबूत है। दवाओं की नियमित उपलब्धता, सघन ट्रैकिंग और निक्षय पोषण योजना जैसी पहलों ने सुनिश्चित किया है कि मरीज अपना इलाज बीच में न छोड़ें।

भविष्य के लिए एक सकारात्मक उम्मीद
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मृत्यु दर का न्यूनतम स्तर 2.1 प्रतिशत पर आना और सफलता दर का 87 प्रतिशत के करीब पहुँचना यह संदेश देता है कि राज्य अब टीबी मुक्त होने के अपने लक्ष्य की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रहा है। सामुदायिक स्तर पर बढ़ती जागरूकता ने इस जानलेवा भय को कम करने में मदद की है, जिससे अब मरीज बिना डरे समय पर अस्पताल पहुँच रहे हैं।

Share This Article
अंग इंडिया न्यूज़ एक समर्पित डिजिटल न्यूज़ पोर्टल है जो भारत की सांस्कृतिक गहराइयों, सामाजिक मुद्दों और जन-आवाज को निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करता है। हमारा उद्देश्य है—हर क्षेत्र, हर वर्ग और हर भाषा को प्रतिनिधित्व देना, ताकि खबरें सिर्फ सूचनाएं न रहें, बल्कि बदलाव की प्रेरणा बनें।हम न सिर्फ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं को कवर करते हैं, बल्कि उन कहानियों को भी उजागर करते हैं जो आमतौर पर मुख्यधारा से दूर रह जाती हैं। अंग इंडिया न्यूज़ का हर लेख, हर रिपोर्ट और हर विश्लेषण एक सोच के साथ लिखा जाता है—"जनता की नज़र से, जनता के लिए।"
- Advertisement -

आपके लिए ख़ास ख़बर

App Icon