सहरसा, अजय कुमार: Saharsa News भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं बिहार सरकार के पूर्व मंत्री आलोक रंजन ने विकसित भारत गारंटी फार रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण अर्थात वीबी जी राम जी बिल को ग्रामीण भारत के सशक्तिकरण, गरीबों की आजीविका की सुरक्षा तथा विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने वाला दूरदर्शी एवं ऐतिहासिक विधेयक बताया है। आलोक रंजन ने कहा कि राम का नाम आते ही कुछ लोगों को अनावश्यक आपत्ति होती है जबकि महात्मा गांधी स्वयं राम राज्य की परिकल्पना करते थे। उन्होने “रघुपति राघव राजा राम” से लेकर “हे राम” तक, गांधी जी का पूरा जीवन इसी विचार से प्रेरित था। यह बिल उसी भावना के अनुरूप हर गरीब को रोजगार, सम्मान और आत्मनिर्भरता देने के उद्देश्य से लाया गया है।
उन्होंने कहा कि यह विधेयक विशेष रूप से गरीब, जनजाति, पिछड़े वर्ग और ग्रामीण श्रमिकों के लिए रोजगार और आजीविका की ठोस गारंटी प्रदान करता है। इस योजना के तहत हर ऐसे ग्रामीण परिवार को, जो अकुशल श्रम करने को तैयार है, प्रति वर्ष 125 दिन का वेतनयुक्त रोजगार मिलेगा। साथ ही वन क्षेत्रों में कार्यरत अनुसूचित जनजाति के श्रमिकों को 25 दिन का अतिरिक्त रोजगार देने का प्रावधान किया गया है, जिससे कृषि और मजदूरी के बीच संतुलन स्थापित होगा। पूर्व मंत्री आलोक रंजन ने स्पष्ट किया कि यह कोई खोखली घोषणा नहीं, बल्कि वित्तीय रूप से समर्थित गारंटी है। मनरेगा पर अब तक कुल 11.74 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, जिनमें से 8.53 लाख करोड़ रुपये वर्तमान सरकार के कार्यकाल में खर्च किए गए। इस बिल में 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक के बजटीय प्रावधान के साथ 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि रोजगार योजनाओं के नाम को लेकर भ्रम फैलाना विपक्ष की पुरानी आदत है।
1980 से लेकर 2005 तक विभिन्न सरकारों ने रोजगार योजनाओं के नाम बदले, लेकिन आज सवाल उठाया जा रहा है। वास्तविकता यह है कि मोदी सरकार में नाम नहीं, काम बोलता है। आलोक रंजन ने कहा कि वर्ष 2005 का ग्रामीण भारत और 2025 का ग्रामीण भारत पूरी तरह बदल चुका है। ग्रामीण गरीबी 2011–12 में 25.7 प्रतिशत थी, जो 2023–24 में घटकर 4.86 प्रतिशत रह गई है। कनेक्टिविटी और आजीविका के नए साधनों के कारण पुराने ओपन-एंडेड मॉडल को पुनः संरचित करना समय की मांग बन गई थी। उन्होंने बताया कि VB–G RAM G बिल में पारदर्शिता और तकनीक को प्राथमिकता दी गई है। रियल-टाइम डेटा अपलोड, GPS आधारित निगरानी, मोबाइल मॉनिटरिंग और AI आधारित फ्रॉड डिटेक्शन से भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण होगा और सही लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचेगा। पूर्व मंत्री आलोक रंजन ने कहा कि नए अधिनियम का फोकस चार प्रमुख प्राथमिकताओं पर है—जल संबंधी कार्य, कोर ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर और खराब मौसम के कारण काम में होने वाली कमी को कम करना। किसानों के हित में बुआई और कटाई के मौसम में 60 दिन कार्य स्थगन का प्रावधान किया गया है, जो मनरेगा में कभी नहीं था।
उन्होंने यह भी बताया कि नए बिल में हर सप्ताह भुगतान, मजदूरी दरों का केंद्र द्वारा निर्धारण, 15 दिन में काम न मिलने पर राज्य सरकार द्वारा बेरोजगारी भत्ता तथा सेन्ट्रल रूरल एम्प्लायमेंट कौसिल के गठन जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। साथ ही पूर्वोत्तर एवं हिमालयी राज्यों में 90:10 तथा अन्य राज्यों में 60:40 के अनुपात में केंद्र-राज्य साझेदारी सुनिश्चित की गई है। अंत में आलोक रंजन ने कहा कि VB–G RAM G बिल गरीबों के सम्मान, ग्रामीण भारत की मजबूती और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक निर्णायक कदम है। भारतीय जनता पार्टी इस जनहितकारी विधेयक के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और देश व राज्य के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष साजन शर्मा, मुख्य वक्ता पूर्व मंत्री बिहार सरकार डॉ आलोक रंजन, जिला महामंत्री शिव भूषण सिंह, भैरवानंद झा, जिला उपाध्यक्ष मनोज यादव, राजीव रंजन साह, मिहीर झा, रिंकी देवी, अरविंद भगत, संजू देवी, सुरजीत सिंह कुशवाहा, अभिलाष कुमार, प्रवक्ता संजीव कूमर, जिला मिडिया प्रभारी सुमित सिन्हा, संतोष गुप्ता, राज किशोर झा,शशि सोनी उपस्थित थे।



