सहरसा, अजय कुमार: संसद में प्रस्तुत केंद्रीय बजट पर पूर्व मंत्री सह निवर्तमान विधायक डॉ आलोक रंजन ने इसे देश की आर्थिक, सामाजिक एवं तकनीकी प्राथमिकताओं को एक सुस्पष्ट दिशा देने वाला ऐतिहासिक व दूरदर्शी बजट बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत एवं विकसित भारत के संकल्प को ठोस नीतियों व कार्यक्रमों के माध्यम से आगे बढ़ाता है। यह बजट इस बात को सुनिश्चित करता है कि सरकार के हर निर्णय व हर कार्य का सीधा लाभ नागरिकों तक पहुंचे। रोजगार सृजन, कृषि उत्पादकता, परिवारों की क्रय शक्ति बढ़ाने एवं नागरिकों को यूनिवर्सल सर्विस उपलब्ध कराने के लिए व्यापक सुधार किये गये हैं।
इन्हीं प्रयासों के परिणामस्वरूप देश की अर्थव्यवस्था लगभग सात प्रतिशत की उच्च विकास दर के साथ आगे बढ़ी है।जिससे गरीबी कम करने एवं जीवन स्तर सुधारने में उल्लेखनीय सहायता मिली है। आत्मनिर्भरता को मार्गदर्शक मानते सरकार ने घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को सुदृढ़ किया है। ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाया है। उच्च मूल्य वाले, प्रौद्योगिकी-उन्नत निर्माण व अवसंरचना उपकरणों के घरेलू उत्पादन को सशक्त करने के लिए एक नई योजना शुरू की जाएगी। जिसमें अग्रिशमन उपकरणों से लेकर लिफ्ट एवं सुरंग-खोदने वाली मशीनों तक को शामिल किया जा सकेगा। देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता को नई उंचाई देने के लिए सरकार इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 लॉन्च करेगी। भारत को वैश्विक जैव-फार्मा विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए सरकार अगले पांच वर्षों में 10 हजार करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ बायो-फार्मा शक्ति परियोजना का प्रस्ताव रखी है।
इससे जैविक एवं जैव-सदृश दवाओं के घरेलू उत्पादन के लिए एक सशक्त पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण होगा।डायबिटीज, कैंसर, हृदय रोग, किडनी एवं लिवर से संबंधित रोगों का रोग-भार लगातार बढ़ रहा है। इसे देखते सरकार का पूरा फोकस रोकथाम, समय पर स्क्रीनिंग एवं प्रारंभिक इलाज पर होगा, ताकि इन बीमारियों से निपटने की राष्ट्रीय क्षमता को और अधिक मजबूत किया जा सके। बजट में कृषि उत्पादकता बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर सृजित करने पर विशेष बल दिया गया है। इससे किसानों की आय, परिवारों की खरीदने की शक्ति और सामाजिक सुरक्षा-तीनों को नई मजबूती मिलेगी। यह बजट भारत को आर्थिक रूप से सशक्त, तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर और सामाजिक रूप से समावेशी राष्ट्र बनाने में मील का पत्थर सिद्ध होगा।



