बिहार के चार जिलों में फाइलेरिया उन्मूलन की रणनीति पर बड़ी बैठक: मरीजों को दिव्यांगता सर्टिफिकेट और एमएमडीपी किट देने पर जोर

पटना: बिहार के पटना, पूर्णिया, बेगूसराय और मोतिहारी जिलों में फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम की बाधाओं, सहयोग और भविष्य की रणनीति पर एम्स पटना, जिला स्वास्थ्य समिति और विमेंस कोलाबोरेटिव फोरम के तत्वावधान में पटना के एक निजी होटल में महत्वपूर्ण बैठक हुई। मुख्य अतिथि सिविल सर्जन डॉ. अविनाश कुमार सिंह ने सभी योग्य फाइलेरिया मरीजों को शीघ्र दिव्यांगता सर्टिफिकेट दिलाकर पेंशन सुनिश्चित करने और समुदाय में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने पर बल दिया।

बैठक में बताया गया कि विश्व के 40% फाइलेरिया मरीज भारत में हैं और बिहार के सभी 38 जिले प्रभावित हैं। पटना जिले में अब तक 1500 हाइड्रोसिल मरीजों का सफल ऑपरेशन हो चुका है। जिला वेक्टर जनित रोग पदाधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र प्रसाद ने कहा कि सभी चिन्हित हाइड्रोसिल मरीजों का शीघ्र ऑपरेशन होगा और हर मरीज को एमएमडीपी किट दी जाएगी। बिहार एकमात्र राज्य है जो फाइलेरिया मरीजों को विशेष चप्पल भी उपलब्ध कराता है।

एम्स पटना के सीएफएम विभागाध्यक्ष डॉ. संजय पांडेय, राज्य फाइलेरिया सलाहकार डॉ. अनुज सिंह रावत, पिरामल स्वास्थ्य के बासब रूज, डब्ल्यूएचओ के डॉ. अरुण कुमार सहित स्वास्थ्य अधिकारी, आशा कार्यकर्ता, जीविका-आईसीडीएस प्रतिनिधि और फाइलेरिया मरीज जीतेंद्र कुमार व बाबू नंद सिंह ने अपने अनुभव साझा किए। पैनल डिस्कशन में अंतर्विभागीय समन्वय और समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने पर सहमति बनी। बैठक का संचालन डॉ. बिजय नंदा नायक और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. संतोष कुमार निराला ने किया। सभी ने 2030 तक बिहार से फाइलेरिया उन्मूलन के लिए एकजुट प्रयास का संकल्प लिया।

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