पटना: राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान बिहार के सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने पटना का नाम बदलकर उसके प्राचीन नाम पाटलिपुत्र करने की मांग की। उन्होंने मौर्य काल के गौरव का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में भारत की सीमाएं बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और अफगानिस्तान तक फैली हुई थीं और बिहार का गौरव पूरी दुनिया में सर्वोच्च था। उपेंद्र कुशवाहा ने राष्ट्रपति के अभिभाषण में देश के गौरवशाली अतीत को याद करने की बात का हवाला देते हुए कहा कि पूर्वजों के योगदान को याद करने से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है और विकसित भारत की यात्रा आगे बढ़ती है।
उन्होंने अन्य शहरों के नाम बदलने के उदाहरण दिए—जैसे बंबई से मुंबई, कलकत्ता से कोलकाता, उड़ीसा से ओडिशा—और सवाल उठाया कि जब इतने नाम बदले जा सकते हैं, तो पटना का नाम पाटलिपुत्र क्यों नहीं किया जा सकता। सांसद ने कहा कि पाटलिपुत्र भारत के गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है तथा बिहार की राजधानी को उसका प्राचीन नाम लौटाया जाना चाहिए।
नाम बदलने की प्रक्रिया में राज्य सरकार को विधानसभा में प्रस्ताव पास करना होता है, उसके बाद केंद्र सरकार (गृह मंत्रालय) की मंजूरी, रेल, डाक, सर्वे ऑफ इंडिया आदि विभागों की सहमति के बाद अधिसूचना जारी होती है। इस मांग से बिहार में ऐतिहासिक पहचान बहाल करने की बहस तेज हो सकती है।



