खड़ाउं परंपरा को जीवंत करने के लिए आचार्य प्रभाकर कर रहे निरंतर खड़ाऊ पदयात्रा

सहरसा,अजय कुमार /

जिले के सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के साधना स्थल खजुरी जो नेपाल टू खगरिया मुख्य मार्ग पर अवस्थित है। हर वर्षों की भांति इस वर्ष भी नरक निवारण चतुर्दशी को चरण पादुका यात्रा प्रात: 5:15 में आरंभ हुआ। साधना स्थल खुजली से मुख्य मार्ग होते हुए चैनपुर पररी चमेली टोला बनगांव वासुदेवा निरहुआ सीहोर वीर पंचगछिया दुनिया ही पुरुषोत्तमपुर पूरी होते हुए दिन के 3:00 बजे बैकुंठ धाम परसरमा पहुंच पूजार्चना के बाद पुजारी दिनेश ओझा को खड़ाऊ समर्पित किया गया।खराउं चरण पादुका को मिथिला में खराम शब्दों से संबोधित किया जाता है। जिसे आम जनों ने अलविदा कर दिया । पूर्व काल में ऋषि मुनि योगी गृहस्थ भी धारण करते कर जीवन पर्यन्त स्वस्थ रहते थे।

प्लास्टिक के चप्पल जूता पहनने से नाना प्रकार का रोग शरीर को ग्रसित कर रहा है । आपके शरीर के ऊर्जा पृथ्वी में न जाए धरती में चुंबकीय गुण होता है जिसके कारण शरीर क्षीण होता है खराउं में कुचालक गुण होता है जो शरीर को रोग मुक्त करने में मदद करता है।वही रीढ़ की हड्डी को मजबूत रखता है। अस्थमा हार्ट ब्लडप्रेशर को नियंत्रित रखता है। पांचों ज्ञानेंद्री को जागरूक करने में सहायक सिद्ध हुआ।

अनेकानेक फ़ायदे हैं।आओ लौट चलें प्रकृति की ओर कितृम चीजें जानलेवा है, नीयमीत खराऊ धारण करें लोगों में जागरूकता बढ़ाएं।छोरब नै तोहर खराम हौ बाबा जपते रहब तोहर नाम।एक वर्ष निर्विरोध 24 एकादशी को यात्रा होने के बाद सालों भर पूर्णिमा को चरण पादुका यात्रा हुआ।

नरक निवारण चतुर्दशी से ही यह यात्रा आरंभ हुआ था जो अब तक चल रहा है। यात्रा को सफल बनाने में गुरुदेव डॉ उदय मिश्र, जयभद्र सुभद्र, सत्यम, प्रियम,श्रेया, नारायण झा निशिकांत राय, चंद्र किशोर राय,प्रकाश राय, रितेश एवं अभिजीत शामिल हुए ।

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