पटना: Better Health बिहार सरकार ने टीबी (तपेदिक) मरीजों की पहचान और उनकी सूचना प्रणाली को सटीक व व्यापक बनाने के लिए निजी स्वास्थ्य क्षेत्र में सक्रिय डॉक्टरों, क्लीनिकों, अस्पतालों और लैब से मिलने वाली सूचनाओं को बेहतर ढंग से एकत्र करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत राज्य सरकार ने “पेशेंट प्रोवाइडर सपोर्ट एजेंसी” के रूप में तीन सहयोगी संगठनों—वर्ल्ड हेल्थ पार्टनर्स (WHP), डॉक्टर्स फॉर यू (DFY) और TRI (ट्राई)—का चयन किया है, जिन्हें राज्य के 33 जिलों में कार्यभार सौंपा गया है।
इन एजेंसियों को प्रतिदिन निजी स्वास्थ्य संस्थानों से टीबी मरीजों की जानकारी एकत्र कर ‘निक्षय पोर्टल’ पर अपडेट करने की जिम्मेदारी दी गई है। राज्य यक्ष्मा कार्यालय के अनुसार, ट्राई को पटना, नालंदा, अरवल, सारण, गोपालगंज, सिवान और पश्चिम चंपारण के सात जिलों में काम सौंपा गया है। वहीं, डॉक्टर्स फॉर यू को 17 जिलों—जैसे गया, औरंगाबाद, नवादा, जहानाबाद, शेखपुरा, वैशाली, भोजपुर, कैमूर, रोहतास आदि—की निगरानी करनी है। वर्ल्ड हेल्थ पार्टनर्स को 9 पूर्वी और कोसी क्षेत्रीय जिलों—जैसे अररिया, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, भागलपुर और बांका—में यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा टीबी उन्मूलन मिशन के तहत यह निर्देश भी जारी किया गया है कि सभी निजी डॉक्टर, क्लिनिक, पैथोलॉजिकल लैब, फार्मेसी और दवा विक्रेता यदि किसी भी संभावित या पुष्ट टीबी मरीज की पहचान करते हैं तो वे उसकी संपूर्ण जानकारी संबंधित जिला टीबी अधिकारी या नोडल पदाधिकारी को हार्ड कॉपी या सॉफ्ट कॉपी में देना सुनिश्चित करें।
इस पहल पर बात करते हुए डॉ. बी.के. मिश्रा, अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी (यक्ष्मा) ने कहा कि “इस व्यवस्था से राज्य में वास्तविक टीबी मरीजों की संख्या का सटीक आंकलन हो सकेगा और उन्हें समय पर दवा और उपचार मुहैया कराना संभव हो पाएगा। निजी क्षेत्र की भागीदारी से यह अभियान और अधिक प्रभावी होगा।” बिहार सरकार का यह प्रयास केंद्र सरकार के वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत अभियान के लक्ष्य के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य हर मरीज को पहचान कर उन्हें पूरी स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराना है—चाहे वह सरकारी तंत्र में आए हों या निजी माध्यम से।

