नई दिल्ली: केंद्रीय बजट 2026 में नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग के करदाताओं को इनकम टैक्स के मोर्चे पर किसी भी तरह की राहत नहीं मिली है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार भी इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया, जिससे साफ हो गया है कि फिलहाल टैक्सपेयर्स को पहले की तरह ही कर चुकाना होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अगली किसी घोषणा तक मौजूदा व्यवस्था ही लागू रहेगी और करदाताओं के पास पुराने टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) और नए टैक्स रिजीम (New Tax Regime) दोनों में से किसी एक को चुनकर ITR फाइल करने का विकल्प बना रहेगा।
बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने इनकम टैक्स एक्ट को लेकर अहम जानकारी देते हुए बताया कि नया इनकम टैक्स कानून (IT Act 2025) एक अप्रैल से लागू किया जाएगा, जिससे टैक्स सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा सरकार ने रिवाइज्ड रिटर्न और ITR-1 व ITR-2 फाइल करने की समय-सीमा बढ़ाने का भी ऐलान किया, जिससे करदाताओं को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन टैक्स दरों में बदलाव की उम्मीद करने वालों को निराशा हाथ लगी है।
अगर पुराने टैक्स रिजीम की बात करें तो इसमें 2.5 लाख रुपये तक की सालाना आय पूरी तरह टैक्स फ्री है। इसके बाद 2.5 लाख से 7 लाख रुपये तक की आय पर 5 प्रतिशत, 7 लाख से 10 लाख रुपये तक 10 प्रतिशत, 10 लाख से 12 लाख रुपये तक 15 प्रतिशत, 12 लाख से 15 लाख रुपये तक 20 प्रतिशत और 15 लाख रुपये से अधिक की आय पर 30 प्रतिशत टैक्स लगता है। वहीं, नई टैक्स रिजीम के तहत 3 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं देना होता, जबकि इसके बाद स्लैब वही रहते हैं, जिनमें 5 प्रतिशत से लेकर 30 प्रतिशत तक की दर लागू होती है।
हाल के वर्षों में सरकार ने नई टैक्स व्यवस्था को ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए कई बदलाव किए हैं और छूट के जरिए 12.75 लाख रुपये तक की आय को टैक्स फ्री भी किया गया है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स अभी भी पुराने सिस्टम को प्राथमिकता देते हैं, क्योंकि उसमें 80C, 80D, होम लोन और अन्य निवेश आधारित छूट का फायदा मिलता है। ऐसे में बजट 2026 ने यह साफ कर दिया है कि फिलहाल सरकार टैक्स स्ट्रक्चर में स्थिरता बनाए रखना चाहती है, हालांकि आने वाले वर्षों में पुराने टैक्स सिस्टम को धीरे-धीरे खत्म किए जाने की अटकलें एक बार फिर तेज हो गई हैं।



