नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को लगातार नौवीं बार पूर्णकालिक बजट पेश करते हुए ऐसा आर्थिक रोडमैप सामने रखा है, जिसे सरकार और सत्तापक्ष ‘हर घर लक्ष्मी पधारे’ की सोच से जोड़कर देख रहे हैं। बजट 2026-27 में जहां एक ओर बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर, रक्षा और मैन्युफैक्चरिंग पर जोर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर आम परिवारों, महिलाओं, युवाओं और छोटे कारोबारियों की आय, खर्च और भविष्य की सुरक्षा को केंद्र में रखा गया है। स्वास्थ्य के मोर्चे पर 17 एंटी-कैंसर और दुर्लभ बीमारियों की दवाओं को कस्टम ड्यूटी से मुक्त कर इलाज को सस्ता बनाया गया है, वहीं मेडिकल टूरिज्म हब और आयुष संस्थानों के विस्तार से रोजगार और निवेश के नए अवसर खुलेंगे। मानसिक स्वास्थ्य को लेकर NIMHANS 2.0 की घोषणा और तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान सामाजिक कल्याण की दिशा में बड़ा कदम माने जा रहे हैं।
आर्थिक मजबूती के लिए MSME सेक्टर को 10 हजार करोड़ रुपये का फंड देकर ‘फ्यूचर चैंपियन’ उद्यमियों को तैयार करने की योजना बनाई गई है, जिससे छोटे कारोबार मजबूत होंगे और घरों तक आमदनी पहुंचेगी। डेटा सेंटर, क्लाउड कंपनियों और टेक्नोलॉजी सेक्टर को टैक्स में राहत देकर भारत को वैश्विक डिजिटल हब बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है, जिसका सीधा फायदा युवाओं को रोजगार के रूप में मिलेगा। सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, ट्रांसपोर्ट और शहरी विकास पर बड़े निवेश से कनेक्टिविटी सुधरेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलेगी। इसके साथ ही बायोफार्मा, सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और रियर अर्थ कॉरिडोर जैसी योजनाएं भारत को आत्मनिर्भर और वैश्विक सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बनाने की रणनीति को दर्शाती हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बजट को ‘अपार अवसरों का राजमार्ग’ बताते हुए कहा कि इसमें नारी शक्ति का सशक्त प्रतिबिंब दिखाई देता है और यह 2047 के विकसित भारत की मजबूत नींव रखता है। सरकार का दावा है कि महंगाई पर नियंत्रण, रोजगार सृजन, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए यह बजट केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम लोगों की जिंदगी में स्थिरता और समृद्धि लाएगा। यही वजह है कि बजट 2026 को एक ऐसे दस्तावेज के रूप में देखा जा रहा है, जो विकास के साथ-साथ हर घर में खुशहाली और आर्थिक सुरक्षा पहुंचाने की कोशिश करता है।



