सहरसा, अजय कुमार: महिषी अंचल क्षेत्र के सरोजा नवटोलिया साधु स्थान में रविवार को मासिक शिव गुरु परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिसमें भगवान शिव की शिष्यता से व्याप्त आध्यात्मि धारा की प्रवाह पर शिव के शिष्य एवं शिष्याओं ने कहा कि भगवान शिव को गुरु मानने के वाद उन्हें शिष्य भाव अर्पित करना पड़ता हैं। परिचर्चा को सम्बोधित करते शिव के शिष्य भाई परमेश्वर ने कहा कि भगवान शिव की शिष्यता को साहब श्री हरीन्द्रानन्द जी ने सम्पुर्ण भारत बर्ष में परिणामदायी गुरु के रूप में स्थापित किया। उन्होंने कहा कि शिव गुरु के चरणों में मन लगाए रखने से ज्ञान स्वत:अर्न्तआत्मा में प्रगट हो जाता हैं और प्राणी सारे भव बंधनों से मुक्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि साहब श्री हरीन्द्रानन्द जी ने शिव को गुरु मानकर जनमानस के बीच 3 सुत्र के माध्यम से शिव गुरु सत्ता से अवगत कराया जिससे आध्यात्मिक यात्रा सरल और सुलभ हुआ।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव को जगत गुरु, आदि गुरु कहा गया,लेकिन इस बात से संसार के लोगों को अवगत नही कराया गया। उन्होंने कहा कि लेकिन ऋषि मुनि,साधकों ने शिव को शिष्य भाव अर्पित कर आज देवत्व को प्राप्त किया जिसका उदाहरण संत शिरोमणि बाबा कारु,और संत शिरोमणि लक्ष्मीनाथ गोसाई हम लोगों के जीवन में परिणाम दायी साबित हो रहें हैं। उन्होंने कहा कि इसी कड़ी के महामानव साहब श्री हरीन्द्रानन्द जी ने शिव से प्राप्त अनुभुति के आधार पर जनमानस से आह्वान किया कि शिव सचमुच के गुरु हैं,जिन्हें शिष्य भाव अर्पित करते रहने पर लौकिक पारलौकिक मनोरथ स्वत: सिद्ध होगा।
उन्होंने कहा कि शिव के शिष्यता की सुगंध आज भारत बर्ष में लोगों को शिव अनुष्ठान के लिए प्रेरित कर रहा हैं। शिव शिष्य हरीन्द्रानन्द फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम को गुरु भाई डोमी राम, विनोद झा, अनिल ठाकुर, ओम प्रकाश लाल, विनय कुमार लाल, बहन किरण, शिव शंकर साह, सुशील, अनिल यादव, शिव कुमार चौधरी, भिखारी यादव, विलास, दिलखुश, बहन अमरिका, किरण, आरती, वीणा, आदि ने कहा कि वर्तमान कालखंड में भगवान शिव और उनकी शिष्यता आध्यात्मिक यात्रा में फलदायी साबित हो रहा है।



