प्रिंस कुमार | अररिया
शहर के एसके रोड स्थित राम प्रकाश प्रसाद के आवास पर आयोजित आठ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन शनिवार को फारबिसगंज पूरी तरह भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। जैसे-जैसे कथा आगे बढ़ी, पंडाल ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयघोष से गूंज उठा और वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
कथावाचक आचार्य नारायण शर्मा ने भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा के चरित्र का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि सच्ची मित्रता धन, वैभव या पद से नहीं, बल्कि निष्काम प्रेम और समर्पण से परखी जाती है। सुदामा की दीन अवस्था और श्रीकृष्ण के द्वारा उन्हें गले लगाकर सम्मान देने का प्रसंग सुन श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
अपने प्रवचन में आचार्यश्री ने भागवत धर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत मनुष्य को अहंकार से मुक्त कर विनम्रता और भक्ति का मार्ग दिखाता है। उन्होंने चौबीस गुरुओं के प्रसंग के माध्यम से समझाया कि यदि सीखने की भावना हो, तो प्रकृति और जीवन का हर अनुभव गुरु बन सकता है। साथ ही भगवान श्रीकृष्ण के विवाह प्रसंग और राजा परीक्षित के मोक्ष मार्ग का भी विस्तार से वर्णन किया गया।
कथा के दौरान भजनों और कीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालु भक्ति में झूमते नजर आए और सस्वर भागवत आरती में भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया। इस अवसर पर मुख्य यजमान परिवार सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष एवं स्थानीय श्रद्धालु उपस्थित रहे।



