फारबिसगंज के गौरवशाली ली अकादमी स्कूल के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित दो दिवसीय ‘शताब्दी गौरव महोत्सव’ का रविवार को भावुक समापन हुआ। कार्यक्रम का दूसरा दिन पुरानी यादों और नई उम्मीदों के अनोखे संगम का गवाह बना। देश-विदेश के विभिन्न कोनों से आए पूर्ववर्ती छात्रों ने जब वर्षों बाद अपने सहपाठियों को गले लगाया, तो परिसर में भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
महोत्सव के दूसरे दिन की शुरुआत एक विशाल शोभायात्रा से हुई। इस शोभायात्रा की खास बात यह रही कि इसमें 1950-60 के दशक के बुजुर्ग पूर्व छात्रों से लेकर वर्तमान समय के छोटे बच्चों तक, यानी तीन पीढ़ियों ने एक साथ कदमताल किया। स्कूल परिसर से शुरू होकर यह यात्रा राजेंद्र चौक, स्टेशन चौक, सदर रोड और छुआपट्टी होते हुए वापस विद्यालय पहुंची। बैंड-बाजे की धुन पर एनसीसी कैडेट्स और स्काउट के बच्चों के साथ पूर्ववर्ती छात्र उत्साह से लबरेज दिखे।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित बिहार विधान परिषद के उप नेता डॉ. राजेंद्र गुप्ता ने भावुक होते हुए कहा, “मैं 42 वर्षों तक दो विश्वविद्यालयों में प्राध्यापक के पद पर रहने के लायक बना, तो यह ली अकादमी की ही देन है। यहाँ के शिक्षकों ने जो संस्कार और शिक्षा दी, उसी ने मेरा व्यक्तित्व गढ़ा।” उन्होंने गर्व से साझा किया कि न केवल उन्होंने, बल्कि उनके पिता ने भी इसी स्कूल से शिक्षा ग्रहण की थी।
ली अकादमी वह विद्यालय जहाँ मैंने अक्षर नहीं, संस्कार सीखे:- ललित सरावगी जैन
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापिका नगमा रूही ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। सेवानिवृत्त शिक्षक मनोज मेहता ने स्कूल के सौ वर्षों के सफर और उसकी उपलब्धियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। आयोजन समिति द्वारा विद्यालय के पूर्व शिक्षकों को मंच पर सम्मानित किया गया, जिसे देख पूर्व छात्र भावुक हो गए। स्कूली छात्र-छात्राओं ने पूर्ववर्ती छात्रों के सम्मान में एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिनकी दर्शकों ने जमकर सराहना की।
महोत्सव के दूसरे दिन स्थानीय विधायक मनोज विश्वास, जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार, और मुख्य पार्षद वीणा देवी बतौर विशिष्ट अतिथि शामिल हुए। सभी वक्ताओं ने ली अकादमी को फारबिसगंज की ‘शैक्षणिक धरोहर’ बताया और इसके स्वर्णिम भविष्य की कामना की।
संवाददाता अंग इंडिया,अररिया /



