नई दिल्ली: दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट की जांच अब एक सुनियोजित और लंबे समय से सक्रिय आतंकी साजिश की परतें खोल रही है, जिसमें सामने आया है कि यह घटना किसी एकल वारदात का हिस्सा नहीं बल्कि करीब चार वर्षों से काम कर रहे एक संगठित ‘व्हाइट कॉलर’ मॉड्यूल की योजना थी। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस नेटवर्क में शामिल आरोपी—जिनमें डॉक्टर और उच्च शिक्षित लोग भी थे—दिल्ली सहित कई बड़े भारतीय शहरों में हाई-प्रोफाइल और भीड़भाड़ वाले ठिकानों को निशाना बनाने की तैयारी कर रहे थे, जिनमें एक वैश्विक कॉफी चेन के आउटलेट्स भी शामिल थे।
शुरुआती जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस मॉड्यूल के तार जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों से जुड़े हो सकते हैं, हालांकि इसकी विस्तृत जांच अभी जारी है। अधिकारियों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर पुलिस से अक्टूबर 2025 में मिले खुफिया इनपुट के बाद की गई समय पर कार्रवाई से नवंबर और दिसंबर के दौरान दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में कई संभावित हमले टाल दिए गए।
जांच में यह भी सामने आया है कि मॉड्यूल ने शैक्षणिक संस्थानों का इस्तेमाल लॉजिस्टिक सपोर्ट और विस्फोटक तैयार करने के लिए किया था, जिससे इसकी साजिश की गंभीरता और व्यापकता का अंदाजा लगाया जा सकता है। एजेंसियों का मानना है कि लाल किला ब्लास्ट सिर्फ एक चेतावनी थी और समय रहते नेटवर्क का खुलासा न होता तो देश को कहीं बड़े नुकसान का सामना करना पड़ सकता था।



