पटना: पटना स्थित राजेंद्र मेमोरियल चिकित्सा विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आरएमआरआई) में बिहार को कालाजार मुक्त घोषित कराने की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक बुधवार को संपन्न हो गई। स्वास्थ्य विभाग और पिरामल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में राज्य के शेष 18 जिलों—अररिया, अरवल, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, भोजपुर, पूर्वी व पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, कटिहार, खगड़िया, किशनगंज, मुजफ्फरपुर, मधुबनी, मुंगेर, पूर्णिया, सारण और सीतामढ़ी—के जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी, विशेषज्ञ चिकित्सक और तकनीकी प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य फोकस कालाजार उन्मूलन से जुड़े डोसियर (दस्तावेजीकरण) को मजबूत और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार करना रहा, ताकि बिहार के उन्मूलन दावे को औपचारिक रूप से प्रमाणित कराया जा सके।
बैठक के दौरान आरएमआरआई के निदेशक डॉ. कृष्णा पांडेय ने कहा कि बिहार ने भले ही 2022 में कालाजार उन्मूलन का लक्ष्य हासिल कर लिया हो, लेकिन इसे प्रमाणिक रूप से सिद्ध करने के लिए डेटा की गुणवत्ता, निरंतर निगरानी और दस्तावेजी साक्ष्य बेहद जरूरी हैं। वहीं, वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. एन.के. सिन्हा ने जिलों को कामिश पोर्टल पर शत-प्रतिशत और सटीक डेटा प्रविष्टि सुनिश्चित करने, पिछले तीन वर्षों के केस लोड, आईआरएस (इनडोर रेसिडुअल स्प्रे), सर्विलांस गतिविधियों और मरीजों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि के भुगतान में किसी भी प्रकार की लंबित स्थिति न रहने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि डोसियर में किसी भी तरह की कमी राज्य के दावे को कमजोर कर सकती है।

पिरामल फाउंडेशन के तकनीकी विशेषज्ञ डॉ. इंद्रनाथ बनर्जी ने बताया कि मुख्य कालाजार के साथ-साथ चमड़ी का कालाजार (पीकेडीएल) अब भी एक गंभीर चुनौती बना हुआ है, इसलिए पूर्व में अधिक प्रभावित जिलों में एक्टिव केस सर्च अभियान को और तेज करने पर सहमति बनी। वहीं, डब्ल्यूएचओ के स्टेट एनटीडी कोऑर्डिनेटर डॉ. राजेश पांडेय ने कहा कि यह समय उपलब्धियों पर संतोष करने का नहीं, बल्कि उन्हें ठोस प्रमाणों के साथ प्रस्तुत करने का है। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि किसी भी जिले में यदि संदिग्ध मरीज सामने आता है तो उसे तुरंत जांच और इलाज की सुविधा दी जाएगी, ताकि संक्रमण की कड़ी पूरी तरह समाप्त की जा सके और बिहार को स्थायी रूप से कालाजार मुक्त राज्य के रूप में स्थापित किया जा सके।



