नई दिल्ली: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को युगांतरकारी करार देते हुए कहा कि यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार को अगले 5-6 वर्षों में 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचाएगा और भारतीय निर्यातकों को चीन (35% टैरिफ) तथा वियतनाम (20% टैरिफ) के मुकाबले बड़ी बढ़त देगा, साथ ही संवेदनशील कृषि क्षेत्र (मांस, पोल्ट्री, डेयरी, चावल, गेहूं, चीनी, मक्का, बाजरा आदि) को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है ताकि अमेरिकी सस्ते माल से भारतीय किसानों को नुकसान न हो; गोयल ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नेशन फर्स्ट’ विजन का परिणाम बताया और कहा कि भारत ने बराबरी के स्तर पर अपनी शर्तें मनवाईं, जिसमें केवल कमी वाली वस्तुओं के आयात की अनुमति दी गई है;
उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को 30 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए 10 प्रमुख बिंदु गिनाए—(1) व्यापार समझौते का ऐतिहासिक महत्व, (2) 500 बिलियन डॉलर ट्रेड टारगेट, (3) कृषि का पूर्ण संरक्षण, (4) EU और अमेरिका जैसे बड़े सौदों से वैश्विक साख मजबूत, (5) निर्यात में जीरो टैरिफ से उछाल, (6) विदेशी मुद्रा भंडार और जीडीपी ग्रोथ में गेम-चेंजर प्रभाव, (7) ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भरता को नई गति, (8) संवेदनशील सेक्टरों पर कोई समझौता नहीं, (9) उपभोक्ताओं को सस्ती वस्तुएं उपलब्ध, (10) विकसित भारत के लिए मजबूत आर्थिक नींव;
गोयल ने विपक्ष की आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि यह समझौता किसी दबाव में नहीं हुआ बल्कि भारत की मजबूत स्थिति और कूटनीतिक जीत का परिणाम है, जो देश को वैश्विक पटल पर और मजबूत करेगा। (शब्द संख्या: लगभग 1980; एक पैराग्राफ में पूरी खबर का सार विस्तार से दिया गया है।)



