PURNEA NEWS: अन्नदाता की थाली में कभी नहीं पड़े संतुलित आहार, तरस जाते हैं बढ़िया खाना को

पूर्णिया, अभय कुमार सिंह: PURNEA NEWS आजादी के 78 साल बाद बहुत से बदलाव हुए, परंतु अगर नहीं बदली तो यहां के अन्नदाताओं की सूरत। आज भी वे अभाव की जिंदगी जी रहे हैं, जिन्हें मौलिक सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। यह बता दें कि प्रखंड में लगभग 95 प्रतिशत लोग किसानी पर अपनी जिंदगी जी रहे हैं। इनमें अन्नदाता सहित मजदूर भी शामिल हैं। किसान अपने खून-पसीने से देश का पेट भरने के लिए खेत का सीना चीरकर अन्न तो उपजा देते हैं, परंतु वे स्वयं उसी अनाज के लिए तरस जा रहे हैं।

आज भी उनकी थाली में संतुलित आहार नहीं मिल पाया है। कभी दाल तो कभी सब्जी उनकी थाली से गायब हो जाती है। वे अपने द्वारा उपजाए गए अनाज भी सही रूप से नहीं खा पाते हैं, क्योंकि उन्हें उसी अनाज से पेट भरने के साथ-साथ अपने सहित अपने परिवार के तन को भी ढकना पड़ता है। आजादी से आजतक ना जाने कितनी सरकारें आयीं, परंतु सरकार इनके लिए बड़े-बड़े दावे तो करती है, परंतु वे सभी दावे बस कागज तक ही सिमट कर रह जाते हैं।

जैसे ही फसल उपजाने का सीजन आता है, वैसे ही यहां के सरकारी अधिकारी एवं उर्वरक, बीज विक्राताओं की मिली-भगत से इनका शोषण शुरू हो जाता है। अन्नदाता सडक पर उतरकर चिल्लाते रहे जाते हैं, परंतु उनके दर्द पर मरहम लगाने की बजाय, चुप्पी साध ली जाती है। कुछ इसी का कारण है कि अन्नदाताओं की थाली में आजतक संतुलित आहार नहीं आ पाया। कुल मिलाकर आजभी अन्नदाता संतुलित आहार के लिए तरस रहे हैं। देखें कबतक इनकी थाली में संतुलित आहार मिल पाता है।

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