ख्यातिलब्ध साहित्यकार चंद्र किशोर जायसवाल सतासीवें बसंत में हुए प्रवेश

पूर्णिया: पूर्णिया की माटी में रचे-बसे ख्यातिलब्ध कथाकार एवं उपन्यासकार चंद्र किशोर जायसवाल ने अपने जीवन के सतासीवें बसंत में प्रवेश किया। उनके जन्मदिवस के अवसर पर पूर्णिया के साहित्यकारों एवं प्रबुद्धजनों ने उनके आवास पर पहुंचकर शुभकामनाएं अर्पित कीं तथा पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र भेंट कर उनका सम्मानपूर्वक अभिनंदन किया।

इस अवसर पर साहित्यप्रेमियों ने उनकी चर्चित कृति ‘गवाह गैरहाजिर’ पर आधारित फिल्म रुई का बोझ का यूट्यूब के माध्यम से सामूहिक अवलोकन किया और फिल्म पर अपने-अपने विचार भी साझा किए।

ज्ञात हो कि चंद्र किशोर जायसवाल देश के प्रतिष्ठित उपन्यासकारों में शुमार हैं। हाल ही में उन्हें इफको साहित्य सम्मान से नवाजा गया है। उनकी प्रमुख रचनाओं में नकबेसर कागा ले भाग, जीवछ का बेटा बुद्धू, पलटनियां, गवाह गैर हाजिर, मनीग्राम, दुःख ग्राम जैसे चर्चित उपन्यास शामिल हैं। वहीं उनका कथा-संग्रह हिंगवा घाट में पानी रे भी अत्यंत चर्चित रहा है। उनकी अनेक कहानियां देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होकर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा प्राप्त कर चुकी हैं, जिन पर कई शोधार्थी अध्ययन भी कर रहे हैं। साहित्य जगत में वे ‘कथा के मौन साधक’ के रूप में विख्यात हैं।

बधाई देने वालों में कवि यमुना प्रसाद बसाक, गिरिजा नंद मिश्र, पवन कुमार जायसवाल, काली शंकर प्रसाद, श्यामल किशोर सिंह, गोविंद कुमार सहित अन्य साहित्यकार उपस्थित रहे। आशुकवि गिरिजा नंद मिश्र ने अभिनंदन भाषण प्रस्तुत किया।

साहित्यकार के सुपुत्र प्रियंवद जायसवाल ने सभी आगंतुकों का गर्मजोशी से स्वागत किया। कटक धाम की ओर से भी उन्हें शुभकामनाएं दी गईं तथा उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की गई।

अपने प्रति मिले इस स्नेह और सम्मान से भावविभोर चंद्र किशोर जायसवाल ने कहा कि उनकी लेखनी जीवन भर अपने पाठकों के लिए निरंतर चलती रहेगी।

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