पूर्णिया: जिले में चल रहे फाइलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम (एमडीए/आईडीए) के तहत लोगों को फाइलेरिया से बचाव के लिए दवा सेवन के प्रति जागरूक करने हेतु एनसीसी बटालियन 35 के कैडेट्स ने जीएमसीएच से शुरू की गई रैली निकाली, जिसमें आसपास के क्षेत्रों में जाकर लोगों को फाइलेरिया की खतरनाकता और एक बार दवा खाने के महत्व का संदेश दिया गया। रैली में एनसीसी कैडेट्स ने नारे लगाते हुए बताया कि फाइलेरिया मच्छर के काटने से फैलने वाली बीमारी है, जो हाथ-पैर, स्तन या पुरुषों में हाइड्रोसील का कारण बनकर हाथीपांव जैसी विकृति पैदा करती है और इसका कोई पूर्ण इलाज नहीं है, इसलिए रोकथाम के लिए साल में एक बार डीईसी, अल्बेंडाजोल और आईवरमेक्टिन की गोली स्वास्थ्य कर्मियों के सामने खाली पेट न खाकर कुछ खाने के बाद खाना जरूरी है।
सिविल सर्जन डॉ. प्रमोद कुमार कनौजिया ने कैडेट्स को संबोधित करते हुए कहा कि फाइलेरिया से सुरक्षा के लिए 2 साल से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और गंभीर बीमार लोगों को छोड़कर सभी को दवा सेवन सुनिश्चित करना चाहिए, और एनसीसी कैडेट्स की यह पहल लोगों में जागरूकता फैलाने में बहुत उपयोगी साबित हो रही है। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. आर.पी. मंडल ने बताया कि यह अभियान 10 से 27 फरवरी तक चल रहा है, जिसमें स्वास्थ्य कर्मी घर-घर पहुंचकर दवा खिला रहे हैं और मामूली साइड इफेक्ट्स (सिरदर्द, चक्कर, उल्टी आदि) से घबराने की जरूरत नहीं, क्योंकि ये दवा के अंदर फाइलेरिया के कीड़े मरने के संकेत हैं।
रैली में जिला भेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी, डीवीबीडीसी सोनिया मंडल, डब्ल्यूएचओ जोनल कोऑर्डिनेटर डॉ. दिलीप कुमार, पिरामल स्वास्थ्य के रणवीर कुमार सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मी भी शामिल रहे। यह अभियान बिहार में 13 करोड़ लोगों को फाइलेरिया से सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यह बीमारी बचपन में संक्रमित होकर 5-15 साल बाद हाथीपांव का रूप ले लेती है। एनसीसी कैडेट्स की सक्रियता से इलाके में दवा सेवन की दर बढ़ने की उम्मीद है।



