पूर्णिया, अभय कुमार सिंह: Purnia News रूपौली प्रखंड मुख्यालय में 20 साल पहले लाखों रुपये की लागत से बनी 17 सरकारी दुकानें आज जंग लगे शटर और झड़ते प्लास्टर के ढेर बनकर पड़ी हैं, जिन्हें कभी भाड़े पर नहीं दिया गया और न ही बेरोजगार युवाओं को आवंटित किया गया, जिससे सड़क किनारे फुटकर दुकानें लगाने वाले गरीबों को अब फिर से बुलडोजर की धमकी मिल रही है।
प्रशासन के अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत SH-65 के किनारे बसे हजारों ठेले-पटरी वालों को 8 दिसंबर तक खुद साफ करने का अल्टीमेटम दिया गया है, वरना 9 दिसंबर से बुलडोजर चलेगा, लेकिन 2022 में तत्कालीन DM सुहर्ष भगत के अभियान के बाद भी थाना चौक फिर अतिक्रमण की चपेट में आ गया, क्योंकि इन 17 दुकानों को कभी चालू ही नहीं किया गया। बढ़ती बेरोजगारी में युवा रोजगार के लिए तड़प रहे हैं, जबकि ये दुकानें सड़क दुर्घटनाओं को न्योता दे रही हैं – प्रखंड विकास अधिकारी अरविंद कुमार ने भरोसा दिलाया कि “बहुत जल्द दुकानों को आवंटित किया जाएगा”, लेकिन जनप्रतिनिधियों के पुराने वादों की तरह यह भी “ढाक के तीन पात” न साबित हो, यह देखना है। बीडीओ का कहना है कि SH-65 के दोनों ओर 500 दुकानें बनाकर अतिक्रमण खत्म और राजस्व बढ़ाया जा सकता है, लेकिन अफसरशाही की लालफीताशाही ने अब तक सब लटका रखा है।



