कनपुरिया अंदाज: जुबान में रौब, लहजे में लट्ठ – PM MODI के ‘हौंक देंगे’ ने फिर दिलाया याद कानपुर की ठसक

PM MODI : कानपुर की ज़ुबान, उसका अंदाज़ और उसकी बोली देशभर में अपनी अलग पहचान रखती है। यह केवल भाषा नहीं, बल्कि एक रवैया है, जिसमें ठसक भी है, भौकाल भी है और एक खास किस्म का अपनापन भी। शुक्रवार को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कानपुर पहुंचे और अपने भाषण के दौरान बोले, “अगर मैं सीधे-सीधे कानपुरिया में कहूं तो दुश्मन कहीं भी हो, हौंक दिया जाएगा,” तो पूरा शहर खुशी से झूम उठा। प्रधानमंत्री के मुंह से निकला ये ठेठ ‘कनपुरिया’ डायलॉग न सिर्फ कानपुर के लोगों को जोश से भर गया, बल्कि एक बार फिर इस शहर की रौबीली भाषा को चर्चा में ला दिया। ‘हौंक देना’ का मतलब होता है जोरदार वार कर देना या पिटाई करना, और जब इसे इतने बड़े मंच से बोला गया, तो ये शब्द देशभर में गूंज गया।

कानपुर की बोली में कुछ ऐसे शब्द और मुहावरे शामिल हैं जो आम बोलचाल को भी मनोरंजन और तंज में बदल देते हैं। जैसे, “ज्यादा बकैती न करो” का मतलब होता है कि ज्यादा फालतू बातें मत करो, जबकि “झाड़े रहो कलेक्टर गंज” तब कहा जाता है जब कोई इंसान बहुत बढ़ा-चढ़ाकर बातें करता है। “गुरु काम 35 होइगा” का मतलब है कि काम हो जाएगा, चिंता मत करो। इसी तरह “कंटाप” का मतलब होता है जोरदार थप्पड़, “भौकाल” का मतलब है किसी का जलवा या रुतबा, “बकैत” होता है बहुत बोलने वाला और “खलीफा” सबसे श्रेष्ठ या बेस्ट इंसान के लिए बोला जाता है। “चिरांद” का इस्तेमाल उलझन या झंझट के लिए होता है और “हियां आव” का मतलब होता है इधर आओ। इन शब्दों का जिक्र न सिर्फ कानपुर की गलियों में होता है बल्कि ये अब फिल्मों और यूट्यूब वीडियोज़ का भी हिस्सा बन चुके हैं।

फिल्में जैसे तनु वेड्स मनु, बुलेट राजा और टशन जैसी फिल्मों में भी इन शब्दों और इस लहजे का खूब इस्तेमाल हुआ है, जिससे यह भाषा राष्ट्रीय पहचान पाने लगी है। यूट्यूब पर कई कनपुरिया कंटेंट क्रिएटर्स ने इस शैली को और लोकप्रिय बना दिया है। जब देश के प्रधानमंत्री भी इस शैली में बोलते हैं, तो यह साबित करता है कि कानपुर की बोली में केवल शब्द नहीं, बल्कि अपनेपन, बेबाकी और जमीनी हकीकत का मेल होता है। यह भाषा अपने आप में एक संस्कृति है, जो हर बार यह जताती है कि “ई कानपुर है गुरु, यहां जुबान में भी लट्ठ होता है।”

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