PURNIA NEWS : पूर्णिया में रविवार को ‘एयरपोर्ट फॉर पूर्णिया एंड डेवलपमेंट फॉर प्रमंडल’ और ‘पूर्णिया सिविल सोसाइटी’ के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय भूख हड़ताल का आयोजन हुआ, जिसमें जिले की वर्षों से लंबित और उपेक्षित विकास योजनाओं को लेकर लोगों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। कार्यक्रम अंबेडकर सेवा सदन परिसर में आयोजित हुआ, जहां बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। आंदोलनकारियों ने कहा कि पूर्णिया समेत आसपास के जिलों की करोड़ों आबादी आज भी बुनियादी सुविधाओं और न्यायिक-सामाजिक अधिकारों से वंचित है, और अब चुप बैठना संभव नहीं। सबसे पहले पूर्णिया एयरपोर्ट परियोजना को लेकर आवाज बुलंद की गई, जिसे 2015 के पीएम पैकेज में शामिल किए जाने के बाद भी अब तक ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। इस परियोजना को धरातल पर लाने की मांग अब जनता के धैर्य की परीक्षा से बाहर हो चुकी है।
इसके साथ ही आंदोलनकारियों ने पूर्णिया में मखाना बोर्ड की स्थापना की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यहां मौजूद कृषि विज्ञान से जुड़ा आधारभूत ढांचा दरभंगा की तुलना में अधिक सक्षम और उपयुक्त है, जिससे यह क्षेत्र मखाना उत्पादकों का वास्तविक केंद्र बन सकता है। पूर्णिया हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को भी दोहराया गया, जिसे पटना हाईकोर्ट की दूरी और स्थानीय लोगों की न्याय तक कठिन पहुंच को देखते हुए बेहद जरूरी बताया गया। वक्ताओं ने बताया कि पूर्णिया के 100 किमी त्रिज्या में आने वाले जिलों – अररिया, कटिहार, किशनगंज, सुपौल, मधेपुरा, सहरसा सहित अन्य इलाकों के लोगों को समय पर न्याय और कानूनी राहत मिलने के लिए स्थानीय हाईकोर्ट बेंच समय की मांग है।
रेलवे से जुड़ी सुविधाओं पर भी सवाल उठाए गए, खासकर पूर्णिया कोर्ट स्टेशन पर वर्षों से लंबित ट्रेन वाशिंग पिट की स्थापना की मांग की गई, जो यात्रियों की सुविधा और स्टेशन के परिचालन के लिए अनिवार्य है। इसके अलावा सीमावर्ती क्षेत्रों और नेपाल की जनता को ध्यान में रखते हुए जोगबनी से पटना वंदेभारत ट्रेन शुरू करने की अपील भी की गई, जिससे न सिर्फ स्थानीय आवागमन में सुविधा होगी, बल्कि सीमावर्ती सहयोग को भी मजबूती मिलेगी। आंदोलनकारियों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से मांग की कि वे आगामी पूर्णिया दौरे के दौरान इन मांगों की घोषणा कर जनता की आशाओं को ठोस रूप दें। प्रदर्शनकारियों ने इस आंदोलन को केवल मांगों की सूची नहीं, बल्कि जनभावनाओं का सीधा प्रतिबिंब बताया और कहा कि यह संघर्ष अब अधिकार और सम्मान की लड़ाई है, जिसे जनता की एकजुटता ही मंजिल तक पहुंचाएगी।



