SAHARSA NEWS,अजय कुमार : साधना स्थल खजुरी अंचल सिमरी बख्तियारपुर उद्भव स्थल, बैकुंठ धाम परसरमा, सुपौल तक आचार्य प्रभाकर के द्वारा समाजिक सद्भाव एवं विश्व कल्याण की कामना से प्रत्येक पूर्णिमा को 32 किलोमीटर तक चरण पादुका पदयात्रा निकाली जाती है। आचार्य प्रभाकर ने कहा कि चरण पादुका धारण करने के दो लाभ हैं आध्यात्मिक और शारीरिक। किसी भी शुभ कार्य में धार्मिक अनुष्ठान में खराऊं का हमारे सनातन धर्म में विशेष महत्व है।खासकर यज्ञोपवीत संस्कार में बरुवा धारण करते हैं। भक्तजन भगवान को खराऊं चढाते है। खराउं धारण करने से मन एकाग्र होता है याददाश्त में वृद्धि होती है अनिंद्य, दुस्स्वप्न से छुटकारा मिलता है नाकारात्मक विचार के साथ हीं अनेकानेक बिमारी से निजात मिलती है।
बिना ईश्वर के इसारा के पत्ता भी नहीं हिलता है,ये यात्रा गोसांई जी के प्रेरणा उन्हीं के आशीर्वाद से आज 55 कांवर स्वरुप खराऊं का भार चढ़ाया गया। ये यात्रा साधना स्थल खजुरी, अंचल सिमरी बख्तियारपुर सहरसा से बैकुंठ धाम परसरमा सुपौल 32 किलोमीटर की दूरी 7 घंटे का समय लगता है। रास्ते में गोसांई जी द्वारा रचित भजन कीर्तन गाते सभी भक्त पूजा अर्चना के बाद मूख्य पूजारी दिनेश बाबा को पादूका अर्पण करते हैं। इस दौरान मुख्य पूजारी दिनेश ओझा, टहलू नथूनी कामत, राजो झा गूरुजी, मोहर देवी, जीवन कुमार सिंह मनतोष राय, बच्चन दास, किशन कुमार, नीरज कुमार, गोलू कुमार राय, प्रिंस कुमार, कुणाल, अभिमन्यु कुमार राय, गुड्डू सहित अन्य लोगों ने पदयात्रा में सराहनीय योगदान दिया।




