SAHARSA NEWS,अजय कुमार : पितृपक्ष के छठे दिन शुक्रवार को दरभंगा जिले के जाले प्रखंड के अहिल्या स्थान स्थित महर्षि गौतम द्वारा स्थापित गौतम कुंड में स्नान तर्पण किया।इस अवसर पर शिवनगर ग्रामीण बासुकी नाथ झा,भाग्य नारायण झा,प्रभाष चन्द्र झा,बसंत कुमार झा,मिलन कुमार झा,वशिष्ठ कुमार,डब्लू झा,सुभाष चन्द्र झा नें देव तर्पण ऋषि तर्पण कर अपने अपने स्वर्गीय पिता,पितामह (दादा), प्रपितामह (परदादा), नाना,परनाना, नानी, परनानी,दादी, परदादी,सहित तीन पीढियो के मृतक को अंजली में कुश धारण कर जलार्पण किया।इस अवसर पर बासुकी नाथ झा ने कहा कि सनातन धर्म में वैज्ञानिक व अध्यात्मिक दृष्टिकोण सें अत्यंत पवित्र और शुभ माना गया है।इस दौरान पन्द्रह दिन पितर यानि पूर्वज पृथ्वी पर अपने परिवार जनों से सुक्ष्म रूप में मिलने आते है।
इस लिए पितृपक्ष के दौरान अपने पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध तर्पण एवं भोजन दान किया जाता है।जिससे पूर्वज संतुष्ट होकर सुख समृद्ध व सौभाग्य का आशीर्वाद प्रदान कर पुन: देवलोक चले जाते है। उन्होंने कहा पितृपक्ष में अपने पूर्वज के निमित्त श्राद्ध,तर्पण, भोजन एवं दान अवश्य करना चाहिए।उन्होंने कहा इस परम्परा का पालन नही करने से पितृदोष लगता है।वही पूर्वज भी उसे श्रापित करते है जिसके कारण उसे जीवन भर अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।उन्होंनें कहा महाभारत काल में कर्ण बहुत बड़े दानी थें उनके दरबार से कोई खाली नही गया। जीवन पर्यत सवा मन सोना दान करते रहे। बड़े धर्मात्मा दानी हुए। देहावसान के पश्चात स्वर्ग मे उन्हे भोजन के रुप में खाने को स्वर्ण ही मिला। उन्हें बताया गया कि आपने स्वर्ण दान तो किया लेकिन अपने पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध तर्पण नही किया। तब कर्ण नें अपनी भूल सुधार के लिए पृथ्वी पर पुन: अवतार लेकर पितृपक्ष में अपने पूर्वजों का श्राद्ध तर्पण कर जीवन कृतार्थ किया।



