अंग इंडिया संवाददाता, पूर्णिया/
पूर्णिया जिले में ग्राम पंचायतों के सशक्तिकरण और सतत् विकास को लेकर जिला प्रशासन ने विशेष कदम उठाए हैं। शनिवार को जिला पंचायत संसाधन केंद्र में आयोजित ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) एवं पंचायत डेवलपमेंट प्लान–पंचायत डेवलपमेंट इंडेक्स (PDP–PDI) आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम का जिला पंचायत राज पदाधिकारी श्री संजय कुमार ने भौतिक निरीक्षण किया।
निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य प्रशिक्षण की गुणवत्ता, प्रगति और पंचायतों के बहुआयामी विकास में इसकी उपयोगिता का मूल्यांकन करना था। श्री कुमार ने प्रशिक्षण सत्रों की विषयवस्तु, प्रशिक्षण पद्धति और प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी का गहन अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि PDP–PDI एवं GPDP कार्यक्रम पंचायतों को उनके वास्तविक जरूरतों के अनुरूप विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, आधारभूत संरचना, सामाजिक न्याय और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में संतुलित विकास तभी संभव है जब पंचायत स्तर पर तथ्यात्मक और सहभागी दृष्टिकोण अपनाया जाए।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान माननीय मंत्री, पंचायती राज विभाग द्वारा भेजा गया नववर्ष शुभकामना कार्ड संबंधित ग्राम पंचायत के मुखिया को वितरित किया गया। जिला पंचायत राज पदाधिकारी ने इसे पंचायत प्रतिनिधियों को नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच के साथ जनसेवा में सक्रिय होने के लिए प्रेरित करने वाला बताया।
कुछ ग्राम पंचायत के मुखिया प्रशिक्षण में अनुपस्थित पाए गए। इसे गंभीरता से लेते हुए श्री संजय कुमार ने अनुपस्थिति का कारण पूछा और अनुपस्थित मुखियाओं से जवाबदेही सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। जिला पंचायत संसाधन केंद्र के नोडल पदाधिकारी श्री दीपक कुमार साह को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया।
निरीक्षण उपरांत जिला पंचायत राज पदाधिकारी ने परिसर में आम का पौधा रोपित कर विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वच्छ, हरित और टिकाऊ पंचायत की परिकल्पना को साकार करने में जनप्रतिनिधियों और पंचायत कर्मियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
श्री संजय कुमार ने स्पष्ट किया कि जिला पदाधिकारी श्री अंशुल कुमार के मार्गदर्शन में पंचायतें विकास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही हैं और PDP–PDI आधारित प्रशिक्षण पंचायत प्रतिनिधियों एवं कर्मियों की क्षमता संवर्धन का प्रभावी माध्यम बन रहा है।



