दो घर, दो जिंदगी, एक पति: पुलिस परामर्श केंद्र में खुला विवाद का सच
पूर्णिया: पूर्णिया पुलिस परिवार परामर्श केंद्र (PTC) में शुक्रवार को महत्वपूर्ण मामलों का निष्पादन किया गया, जिसमें पाँच ऐसे परिवार थे जो टूटने के कगार पर पहुँच चुके थे। केंद्र की संयोजिका, सह महिला थाना अध्यक्ष शबाना आजभी, सदस्य अधिवक्ता दिलीप कुमार दीपक, स्वाति वैश्य, यंत्री बबीता चौधरी, जीनत रहमान, रविंद्र शाह, एवं PTC पालमति सामत ने मिलकर इन परिवारों को समझाया और उन्हें पुनः जोड़ने में सफलता हासिल की।
हालांकि, तीन मामले ऐसे भी थे, जहां पति-पत्नी की जिद और नासमझी के कारण समझौता संभव नहीं हो पाया। इनमें केहॉट के एक जोड़े का मामला सबसे जटिल था। शादी के 25 साल बाद भी पति-पत्नी के बीच विवाद इस कदर बढ़ गया कि मामला पुलिस अधीक्षक तक पहुँच गया। पत्नी ने शिकायत की कि उसका पति घर में दूसरी शादीशुदा महिला को रखता है, उसका भरण-पोषण करता है और सभी सुख सुविधाएँ प्रदान करता है, जबकि अपनी पहली पत्नी का भरण-पोषण ठीक ढंग से नहीं करता।
पत्नी ने स्पष्ट किया कि वह पति के साथ तभी रहेगी जब दूसरी महिला को घर से निकाल दिया जाए। पति ने जवाब में कहा कि वह दोनों महिलाओं का भरण-पोषण करेगा और दोनों को अलग-अलग घर देगा। इसके बावजूद पत्नी समझौता करने को तैयार नहीं हुई। उन्होंने यह भी बताया कि मामला न्यायालय में पहले से लंबित है।
केंद्र के लाख समझाने और मध्यस्थता प्रयासों के बावजूद जब पति-पत्नी एक साथ रहने के लिए सहमत नहीं हुए, तो केंद्र ने दोनों पक्षों को सलाह दी कि इस विवाद को न्यायालय के माध्यम से ही हल किया जाए, ताकि कानूनी रूप से उचित समाधान सुनिश्चित हो सके।
केंद्र के अधिकारियों ने इस मौके पर कहा कि परिवारिक विवादों में समय पर मध्यस्थता और समझाइश से कई घरों को टूटने से बचाया जा सकता है, लेकिन कुछ मामलों में कानूनी रास्ता ही अंतिम विकल्प होता है।