संसद की सीढ़ियों से सोशल मीडिया तक: शशि थरूर के फिसलने का वीडियो, कविता की पंक्तियाँ और इसके सियासी मायने

नई दिल्ली: संसद भवन परिसर में बुधवार को घटी एक छोटी-सी घटना ने देखते ही देखते बड़ा सियासी और सोशल मीडिया विमर्श खड़ा कर दिया। कांग्रेस सांसद शशि थरूर संसद परिसर की सीढ़ियों से उतरते समय फोन पर बात कर रहे थे, तभी उनका संतुलन बिगड़ गया और वे लड़खड़ा गए। संयोग से उनके बगल में खड़े समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने तुरंत उन्हें संभाल लिया और हाथ पकड़कर सुरक्षित नीचे ले आए।

इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो किसी मौजूद व्यक्ति ने रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सामने आते ही थरूर के स्वास्थ्य को लेकर अटकलें और चिंताएं शुरू हो गईं। इन्हीं चर्चाओं के बीच खुद शशि थरूर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर वही वीडियो साझा कर स्थिति स्पष्ट की और लिखा, “जिस दीए को तूफां में जलना होगा, उसे संभल-संभल के चलना होगा। मैं ठीक हूं।” उनकी इस शायरी भरी पंक्ति ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी। कई लोग इसे मौजूदा राजनीतिक माहौल और विपक्ष की चुनौतियों से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे सिर्फ एक आत्मीय और सकारात्मक संदेश मान रहे हैं।

दिलचस्प बात यह रही कि इसी दिन संसद परिसर में राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच तीखी नोकझोंक भी चर्चा का विषय बनी रही, जिससे पूरे दिन संसद का सियासी तापमान ऊंचा रहा। ऐसे में शशि थरूर का यह वीडियो और उनका संदेश सिर्फ एक व्यक्तिगत घटना तक सीमित न रहकर, संसद की हलचल और राजनीति के व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है।

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