पूर्णियाँ / किशन : पूर्णियाँ विश्वविद्यालय, पूर्णियाँ के सीनेट हॉल में शनिवार को माननीय कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय के सभी अंगीभूत महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय स्तर पर लंबित प्रशासनिक, वित्तीय, सेवा, लेखा एवं परीक्षा संबंधी मामलों की विस्तृत समीक्षा कर उनके समयबद्ध निष्पादन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान करना था। बैठक की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने के लिए सभी लंबित मामलों का निर्धारित समय-सीमा के भीतर निष्पादन अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने सभी प्रधानाचार्यों को निर्देश दिया कि विभिन्न लंबित मामलों से संबंधित प्रतिवेदन, अभिलेख एवं आवश्यक दस्तावेज शीघ्र विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराए जाएं, ताकि किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब न हो।बैठक में राजभवन सचिवालय, बिहार, पटना से प्राप्त निर्देशों के आलोक में महाविद्यालयों में लंबित वेतन भुगतान एवं अन्य वित्तीय दायित्वों की समीक्षा की गई। कुलपति ने सभी प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया कि लंबित भुगतानों का विस्तृत विवरण तैयार कर तत्काल विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराया जाए, जिससे आवश्यक कार्रवाई समय पर सुनिश्चित की जा सके। सेवांत लाभ (पेंशन, ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण सहित अन्य लाभ) से संबंधित लंबित मामलों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। निर्देश दिया गया कि जिन शिक्षकों एवं कर्मचारियों के सेवांत लाभ लंबित हैं, उनकी अद्यतन सूची तैयार कर अविलंब विश्वविद्यालय को भेजी जाए, ताकि संबंधित मामलों का शीघ्र निष्पादन किया जा सके।
बैठक में वेतन सत्यापन एवं वेतन निर्धारण से संबंधित लंबित मामलों की भी समीक्षा की गई। कुलपति ने स्पष्ट निर्देश दिया कि जिन शिक्षकों एवं कर्मचारियों का वेतन सत्यापन अभी तक लंबित है, उनका सत्यापन एवं वेतन निर्धारण प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण किया जाए।महाविद्यालयों में संधारित विभिन्न खातों के अंकेक्षण (ऑडिट) की स्थिति पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। सभी प्रधानाचार्यों को नियमित आंतरिक अंकेक्षण सुनिश्चित करने तथा लेखा अभिलेखों को अद्यतन रखने का निर्देश दिया गया।
प्रोन्नत शिक्षकों के बकाया वेतन अंतर के प्री-ऑडिट के संबंध में निर्णय लिया गया कि संबंधित शिक्षकों की व्यक्तिगत संचिकाएं तैयार कर विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही फरवरी 2018 से पूर्व तथा मार्च 2018 के बाद के वेतन अंतर का पृथक-पृथक विवरण तैयार कर भेजने का भी निर्देश दिया गया।बैठक में मार्च 2018 के उपरांत स्थायी रूप से नियुक्त कर्मचारियों के जीआईसी (GIC) भुगतान की स्थिति की समीक्षा की गई। इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई हेतु संबंधित विश्वविद्यालयों से पत्राचार करने का निर्णय लिया गया। साथ ही राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) से संबंधित कटौती एवं लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया।

परीक्षा संबंधी मदों में महाविद्यालयों पर बकाया राशि के समायोजन की समीक्षा करते हुए सभी केंद्राधीक्षकों को आवश्यक समायोजन कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए, ताकि परीक्षा संबंधी वित्तीय अभिलेख समय पर अद्यतन किए जा सकें।बैठक में शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की सेवा पुस्तिकाओं के अद्यतन की स्थिति की भी समीक्षा की गई। सभी प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया गया कि सेवा पुस्तिकाओं को दिसंबर 2025 तक अद्यतन कर 31 अगस्त तक विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराया जाए।इसके अतिरिक्त शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के एसीपी/एमएसीपी (ACP/MACP) से संबंधित मामलों की समीक्षा की गई। आगामी वित्तीय वर्ष 2027-28 के बजट निर्माण की तैयारियों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
सभी महाविद्यालयों को निर्देश दिया गया कि इस वर्ष समर्थ पोर्टल के माध्यम से निर्धारित प्रारूप में बजट तैयार कर समय पर विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराया जाए।बैठक में महाविद्यालयों के खाता संख्या-1 की स्थिति की भी समीक्षा की गई तथा आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई के लिए संबंधित प्रधानाचार्यों को दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक के अंत में कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता सभी लंबित प्रशासनिक एवं वित्तीय मामलों का पारदर्शी, उत्तरदायी एवं समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करना है। उन्होंने सभी प्रधानाचार्यों से अपेक्षा व्यक्त की कि वे विश्वविद्यालय के साथ समन्वय स्थापित करते हुए सभी आवश्यक कार्य निर्धारित समय के भीतर पूर्ण करेंगे, जिससे विश्वविद्यालय की प्रशासनिक एवं वित्तीय व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बन सके।