पूर्णियाँ / किशन : पूर्णियाँ विश्वविद्यालय की 26वीं विद्वत परिषद् (एकेडमिक काउंसिल) की बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नवीन दिशा-निर्देशों के अनुरूप कई महत्वपूर्ण शैक्षणिक प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई। इन निर्णयों को विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक एवं छात्र-केंद्रित उच्च शिक्षा व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बैठक में सबसे पहले पूर्व में आयोजित 26वीं विद्वत परिषद् की बैठक के निर्णयों की पुष्टि की गई। इसके बाद राजभवन सचिवालय के निर्देशों के आलोक में द्विवर्षीय स्नातकोत्तर (पीजी) कार्यक्रम के प्रथम वर्ष के लिए प्रस्तावित पाठ्यक्रमों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। परिषद् ने वर्तमान में विश्वविद्यालय में संचालित विषयों—भूगोल, वनस्पति विज्ञान, उर्दू, राजनीति विज्ञान, बांग्ला, गृह विज्ञान एवं संस्कृत—के नवीन पाठ्यक्रमों को मंजूरी प्रदान की। साथ ही स्पष्ट किया गया कि जिन विषयों का संचालन अभी विश्वविद्यालय में नहीं हो रहा है, उनके पाठ्यक्रमों पर आवश्यकता के अनुसार भविष्य में निर्णय लिया जाएगा।
बैठक में एनईपी-2020 के अनुरूप द्विवर्षीय (चार सेमेस्टर) एवं एकवर्षीय (दो सेमेस्टर) स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के प्रारूप अध्यादेश एवं विनियमावली को भी सिद्धांततः स्वीकृति दी गई, जिससे विश्वविद्यालय में नई शिक्षा व्यवस्था को लागू करने का मार्ग और अधिक स्पष्ट हो गया।परिषद् ने चार वर्षीय सीबीसीएस स्नातक पाठ्यक्रम के अंतर्गत कौशल संवर्धन पाठ्यक्रम (एसईसी) के रूप में ‘क्रॉसवर्ड्स’ विषय को सेमेस्टर-1 से सेमेस्टर-4 तक लागू करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी।

विश्वविद्यालय का मानना है कि इससे विद्यार्थियों की भाषा दक्षता, तार्किक सोच, शब्द ज्ञान एवं बौद्धिक क्षमता का विकास होगा।बैठक में चार वर्षीय सीबीसीएस स्नातक अध्यादेश एवं विनियमावली में ‘एग्जिट ऑप्शन’ से संबंधित संशोधन को भी अनुमोदित किया गया। यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के मल्टीपल एंट्री एवं मल्टीपल एग्जिट प्रावधान के अनुरूप विद्यार्थियों को विभिन्न चरणों पर शिक्षा पूरी करने और पुनः प्रवेश लेने की सुविधा प्रदान करेगी।
इसके अलावा परिषद् ने “यूनिफॉर्म ऑर्डिनेंस एंड रेगुलेशंस (मिनिमम स्टैंडर्ड्स एंड प्रोसीजर फॉर अवॉर्ड ऑफ पीएचडी डिग्री), 2026” को विश्वविद्यालय में अंगीकृत करने की स्वीकृति दी। इस निर्णय से पीएचडी शोध कार्यों की गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं शोध उपाधि प्रदान करने की प्रक्रिया यूजीसी के नवीन मानकों के अनुरूप और अधिक व्यवस्थित एवं प्रभावी होगी।बैठक के अंत में परिषद् के सदस्यों ने विश्वास व्यक्त किया कि लिए गए सभी निर्णयों के प्रभावी क्रियान्वयन से पूर्णिया विश्वविद्यालय में शैक्षणिक उत्कृष्टता, शोध संस्कृति तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों को नई गति मिलेगी।
साथ ही विद्यार्थियों को समयानुकूल, गुणवत्तापूर्ण एवं रोजगारोन्मुख उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में विश्वविद्यालय और अधिक सशक्त होगा।