अमौर से छह बार विधायक रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने दिल्ली एम्स में ली अंतिम सांस, राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर
पूर्णियाँ : सीमांचल की राजनीति के कद्दावर नेता, अमौर विधानसभा क्षेत्र से छह बार विधायक रहे और बिहार सरकार के पूर्व मंत्री अब्दुल जलील मस्तान का निधन हो गया। उन्होंने शनिवार, 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे और अस्पताल के आईसीयू में भर्ती थे। उनके निधन की खबर से पूर्णिया, अमौर समेत पूरे सीमांचल में शोक की लहर दौड़ गई है।
चार दशक तक सक्रिय रही राजनीतिक पारी
अब्दुल जलील मस्तान बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शामिल थे। उन्होंने वर्ष 1985 में अमौर विधानसभा क्षेत्र से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की। करीब चार दशक के लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने अमौर की जनता का छह बार विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया। क्षेत्र के लोगों के बीच उनकी मजबूत पकड़ और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों पर सक्रियता ने उन्हें सीमांचल की राजनीति में एक अलग पहचान दिलाई।
मस्तान ने कांग्रेस के टिकट पर अमौर विधानसभा सीट से 11 बार चुनाव लड़ा और छह बार जीत हासिल की। राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बावजूद क्षेत्र की राजनीति में उनका प्रभाव बना रहा।
महागठबंधन सरकार में संभाली मंत्री पद की जिम्मेदारी
वर्ष 2015 में नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनी महागठबंधन सरकार में अब्दुल जलील मस्तान को उत्पाद, मद्य निषेध एवं निबंधन विभाग का मंत्री बनाया गया था। उनके कार्यकाल के दौरान वर्ष 2016 में बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू की गई। इस ऐतिहासिक निर्णय के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी उनके विभाग के पास थी।
नेताओं ने जताया शोक
अब्दुल जलील मस्तान के निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है। अमौर के वर्तमान विधायक अख्तरुल ईमान ने उन्हें सीमांचल में गरीबों की आवाज बताते हुए श्रद्धांजलि दी। वहीं, पूर्व विधायक सबा जफर ने भी उनके निधन पर शोक जताया और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
मस्तान के निधन को सीमांचल की राजनीति के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है। लंबे समय तक जनता के बीच सक्रिय रहे इस वरिष्ठ नेता के निधन से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में एक बड़ा खालीपन पैदा हुआ है।