कुलपति की सुरक्षा में निजी बॉडीगार्ड तैनात हैं, फिर भी पूर्णियाँ विश्वविद्यालय के प्रशासनिक परिसर में घुसकर मारपीट और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। ऐसे में छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
पूर्णियाँ : विश्वविद्यालय के प्रशासनिक परिसर में देर रात छात्र नेताओं के बीच हुई झड़प ने विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि विवाद विश्वविद्यालय के समीप चौक पर शुरू हुआ और देखते ही देखते मामला हाथापाई तक पहुंच गया। इसके बाद संबंधित लोग विश्वविद्यालय के सामने से होते हुए गार्ड रूम की तरफ से प्रशासनिक परिसर में प्रवेश कर गए और वहां भी मारपीट जारी रही। इस दौरान परिसर में लगे गमले टूट गए और विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि देर रात विश्वविद्यालय का प्रशासनिक परिसर खुला और असुरक्षित कैसे रहा? जब परिसर में सुरक्षाकर्मी तैनात हैं, तो बाहरी या विवाद में शामिल लोग गार्ड रूम की तरफ से प्रशासनिक परिसर में प्रवेश कर कैसे गए. यदि सुरक्षाकर्मी मौजूद थे, तो समय रहते उन्हें रोकने और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश क्यों नहीं हो सकी. घटना के बाद सुबह विश्वविद्यालय खुलते ही प्रॉक्टर डॉ. यू. एन. सिंह ने घटना के समय ड्यूटी पर तैनात सभी गार्डों को तलब और उन्हें कड़ी फटकार लगाने के बात सामने आ रही है।
कुलपति की सुरक्षा में निजी सुरक्षा, फिर विश्वविद्यालय की सुरक्षा का क्या.
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक और सवाल चर्चा में है। जब विश्वविद्यालय के कुलपति अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए निजी बॉडीगार्ड रखते हैं, तो उसी विश्वविद्यालय परिसर में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है, इस पर विचार करना जरूरी है। एक तरफ विश्वविद्यालय के शीर्ष पदाधिकारी की व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए अतिरिक्त व्यवस्था की जाती है, वहीं दूसरी तरफ देर रात लोग प्रशासनिक परिसर में प्रवेश कर आपस में मारपीट करते हैं और विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे में स्वाभाविक रूप से सवाल उठता है कि आखिर आम छात्र-छात्राएं परिसर में अपनी सुरक्षा को लेकर कितना भरोसा महसूस करें. अगर गार्डों की मौजूदगी के बावजूद देर रात प्रशासनिक परिसर में घुसकर मारपीट हो सकती है, तो छात्र-छात्राओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है. छात्रों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मियों की जिम्मेदारी केवल छात्रों को रोकने-टोकने या छात्राओं के साथ कथित धक्का-मुक्की तक सीमित है, या फिर उनका वास्तविक दायित्व विश्वविद्यालय परिसर की सुरक्षा, अनधिकृत प्रवेश रोकना और विवाद की स्थिति में तत्काल कार्रवाई करना भी है.
विश्वविद्यालय प्रशासन को इस घटना को केवल गार्डों को फटकार लगाने तक सीमित नहीं रखना चाहिए। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि देर रात प्रशासनिक परिसर में प्रवेश कैसे हुआ, सुरक्षा व्यवस्था में चूक कहां हुई और घटना के समय तैनात सुरक्षाकर्मियों ने क्या कार्रवाई की।विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं और कर्मचारियों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। जब विश्वविद्यालय का प्रशासनिक परिसर ही देर रात सुरक्षित नहीं रह पाए और सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी में मारपीट तथा संपत्ति को नुकसान पहुंच जाए, तो विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।