BIHAR POLITICS : जन सुराज पार्टी ने किया NDA सरकार के दावों का पर्दाफाश, शिक्षक भर्ती और रोजगार पर उठाए सवाल

BIHAR POLITICS : जन सुराज पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता मनोज बैठा और अमित विक्रम ने आज पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिहार सरकार के शिक्षा और रोजगार संबंधी दावों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने शिक्षक भर्ती में अनियमितताओं और राज्य में औद्योगिक विकास के वादों के खोखलेपन को उजागर किया। प्रवक्ताओं ने शिक्षा विभाग में 3 लाख नौकरियों के सरकारी दावे का खंडन करते हुए कहा कि तीन चरणों में हुई शिक्षक बहाली में अब तक कुल 2,68,548 शिक्षकों की भर्ती हुई है – प्रथम चरण में 1,20,336, द्वितीय चरण में 96,823 और तृतीय चरण में 51,389।हमारे सूत्रों से प्राप्त ठोस जानकारी के आधार पर हम दावा करते हैं कि लगभग 2.68 लाख भर्तियों में से एक तिहाई यानी 80-90 हजार पद डोमिसाइल नीति हटाने के कारण बिहार से बाहर के अभ्यर्थियों को मिल गए,” बैठा ने कहा। उन्होंने आगे बताया कि इन भर्तियों में लगभग 90 हजार ऐसे शिक्षक हैं जो पहले से ही नियोजित शिक्षक थे और राज्य कर्मी बनने के प्रलोभन में या जूनियर कक्षाओं से सीनियर कक्षाओं में जाने के उद्देश्य से BPSC की परीक्षा पास कर गए। कुल मिलाकर 2.70 लाख में से 1.80 लाख या तो बाहरी राज्यों के हैं या वे लोग हैं जो पहले से ही शिक्षक थे। केवल 80-90 हजार बिहारी युवाओं को नौकरी मिली है, और इसमें भी बड़ी संख्या में फर्जी आवासीय और आधार कार्ड के जरिए अन्य राज्यों के लोग शिक्षक बन गए हैं,” उन्होंने आरोप लगाया।

अमित विक्रम ने औद्योगिकरण और रोजगार सृजन पर सरकार के वादों की पोल खोलते हुए कहा, “2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने बांका में 20 हजार करोड़ रुपए के अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट की घोषणा की थी। हमारा सवाल है, कहां है वह पावर प्रोजेक्ट और कहां गए वे 20 हजार करोड़ रुपए? उन्होंने शाहनवाज हुसैन के 2022 के वादे का भी जिक्र किया जब उन्होंने बिहार में पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क खोलने की बात कही थी। “जमीन भी चिन्हित हो गई थी, लेकिन कहां गया वह टेक्सटाइल पार्क? पूरे देश में सात टेक्सटाइल पार्क बने हैं, लेकिन केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह अपने ही राज्य बिहार में एक टेक्सटाइल पार्क नहीं ला सके, उन्होंने कहा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों प्रवक्ताओं ने सरकार से मांग की कि शिक्षक भर्ती पर एक श्वेत पत्र जारी किया जाए और यह बताया जाए कि कितने बिहारी युवाओं को वास्तव में नई नौकरियां मिली हैं।

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