सहरसा, अजय कुमार: SAHARSA NEWS महिषी प्रखंड स्थित नकुलेश्वर महादेव मंदिर नाकुच गमरहो में सोमवार को 31 वां आध्यात्मिक वार्षिक शिव गुरु परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा को सम्बोधित करते शिव शिष्य भाई परमेश्वर ने कहा कि हमारे आध्यात्मिक ग्रन्थ तथा ऋषि मुनियों ने भगवान शिव को जगत गुरु कहा लेकिन शिव शिष्य साहब श्री हरिन्द्रानन्द जी ने उन्ही जगत गुरु शिव को जन जन के शिव वास्तव में गुरु हो जाय साहब श्री के इसी संवाद को लेकर यहां शिव शिष्यों की बैठक होती रही। उन्होनें कहा कि यह वही स्थल है जहां संत बाबा कारु खिरहरि को आत्मदर्शन हुआ और आज महादेव की दया से वे शिव के शिष्य के रुप में पुजित है। उन्होंने भगवान शिव की शिष्यता एक आध्यात्मिक रहस्य पर कहा कि भगवान शिव जो शरीर में दिखाई नही देते लेकिन व्यवहार में गुरु का काम करते हैं।
बैठक में उपस्थित गुरु भाई एवं बहना को सम्बोधित करते भाई परमेश्वर ने कहा कि शिव के विभिन्न देवता स्वरुपों की पुजा अर्चना एवं उनसे जुड़ाव की प्रक्रिया भारत में स्थापित रही लेकिन भारतीय जनमानस में भगवान शिव को अपना शिष्य का भाव ना जाने किन कारणों से अर्पित नही किया गया। उन्होंने कहा इस कालखंड के शिव के प्रथम शिष्य साहब श्री हरीन्द्रानन्द जी ने अश्रृद्धा, अविश्वास, और संशय की मन:स्थिति में शिव को अपना गुरु मानकर शिष्य भाव देने के क्रम में पाया कि जो शिव शरीर में दिखाई नही देते वे व्यवहार में गुरु का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि साहब श्री ने जबसे यह संवाद लोगों को देना प्रारंभ किए और लोग शिव को गुरु मानकर इस दिशा में चलने का प्रयास करने लगे तब से शिष्यों ने यह महसूस करने लगा कि शिव को शिष्य भाव अर्पित करने से वे अपने शिष्यों के सम्पुर्ण भार का वहन करते हैं।उनके इसी संकल्प के अधीन शिव शिष्य हरीन्द्रानन्द फाउंडेशन सहरसा ने लगातार आध्यात्मिक बैठक का आयोजन कर जनमानस से आह्वान किया कि भगवान शिव को गुरु मानकर अपना शिष्य भाव अर्पित करें।
उन्होंने उदाहरण देते कहा कि चित्रित शिव परिवार में जहां बाध और बैल, मोर और सर्प,सर्प और चुहा विपरीत प्रवृति के होने के बावजूद भी आपस में प्रेम से रहते हैं, भगवान शिव की शिष्यता भी यही है। भाई परमेश्वर ने कहा कि मूल मानवीय गुणों से जब मानव का मन भटकने लगता है तब शिव की शिष्यता ही मानव में अवगुणों को त्याग करने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि शिव की शिष्यता को स्वयं भगवान शिव ने साहब श्री के माध्यम से अपने दया की बसात से प्रमाणित किया जो समाज में अब परिलक्षित होने लगा है। मौके पर उपस्थित डोमी राम,किरण दीदी, शशि यादव, नारायण झा, लक्ष्मी दीदी, जटेश्वर राय, मधेपुरा से राजकुमार यादव, सुपौल वलवा से अंजनी ठाकुर, जटाशंकर जी, राजेश जी, दरभंगा से श्याम जी, खगड़िया से डा विमलेश कुमार, अशोक सिंह, चन्दन मुखिया, ने कहा कि शिव गुरु ही एक उपाय है जिसे शिष्य भाव अगर अर्पित किया जाय तो आपके जीवन में भी अच्छे परिणाम की अनुभूति होगी।



