संवाददाता अंग इंडिया/ अमौर (पूर्णिया)।
अमौर विधानसभा क्षेत्र को जिले के सबसे पिछड़े विधानसभा क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां सड़क और पुल-पुलियों की बदहाल स्थिति वर्षों से आम लोगों की पीड़ा का कारण बनी हुई है। इसी कड़ी में अमौर प्रखंड के परमान नदी पर स्थित रसेली घाट का बहुप्रतीक्षित पुल आज भी ग्रामीणों के लिए एक अधूरा सपना बना हुआ है।
वर्ष 2013 में सात स्पैन वाले इस पुल का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। तब ग्रामीणों को उम्मीद जगी थी कि आज़ादी के बाद से नाव के सहारे होने वाले आवागमन से उन्हें मुक्ति मिलेगी और आवाजाही सुगम होगी। लेकिन 12 वर्ष बीत जाने के बाद भी पुल का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। स्थिति यह है कि अब तक केवल पांच स्पैन ही किसी तरह तैयार हो पाए हैं।
पुल निर्माण में हो रही अत्यधिक देरी को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और संवेदक की मनमानी के कारण बीते सात वर्षों में भी पुल का कार्य पूरा नहीं हो सका। मो. अख्तर, अब्दुल वाहिद, मो. परवेज आलम, अमीनुद्दीन, मकसूद, इसराइल, अशफाक, निजाम, मुस्तफा, इमामुद्दीन सहित अन्य ग्रामीणों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि आम लोगों की समस्याओं से न तो विधायक को कोई सरोकार है और न ही सांसद को।
ग्रामीणों के अनुसार, शुरुआत में कुछ दिनों तक निर्माण कार्य में तेजी दिखाई दी, लेकिन बाद में इसकी रफ्तार कछुए से भी धीमी हो गई। करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाले इस पुल पर कभी पांच तो कभी दस मजदूर ही नजर आते थे, जबकि बीते कई महीनों से निर्माण स्थल पर मजदूर दिखाई भी नहीं दे रहे हैं।
पुल अधूरा रहने के कारण परमान नदी पार करने के लिए लोगों को आज भी नाव का सहारा लेना पड़ता है। जल्दबाजी को लेकर अक्सर राहगीरों के बीच कहासुनी होती रहती है और इस घाट पर छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं भी होती रही हैं। चारपहिया वाहनों को नदी पार करने के लिए पांच मिनट की दूरी के बजाय आधे घंटे तक का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि यदि विभाग समय रहते गंभीर होता तो पुल का निर्माण अब तक पूरा हो चुका होता। निर्माण अवधि के दौरान न तो विभागीय अधिकारी कभी स्थल पर नजर आए और न ही अब कोई सुध लेने वाला है। ग्रामीणों ने विभागीय पदाधिकारियों से जल्द से जल्द पुल निर्माण कार्य पूरा कराने की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्य शुरू नहीं हुआ तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करने को बाध्य होंगे।



