अररिया: जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में मंगलवार को नवचयनित पारा विधिक स्वयंसेवकों (PLV) के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, गुंजन कुमार पाण्डेय ने की।
“शोषितों और वंचितों के लिए सेतु का कार्य करें स्वयंसेवक”
प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गुंजन कुमार पाण्डेय ने स्वयंसेवकों को उनकी जिम्मेदारी का बोध कराया। उन्होंने कहा कि समाज के असहाय और वंचित वर्ग, जो आर्थिक तंगी के कारण न्याय तक नहीं पहुँच पाते, उनके लिए पारा विधिक स्वयंसेवकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। पीएलवी ऐसे लोगों और न्याय प्रणाली के बीच एक सेतु (पुल) के रूप में कार्य करते हैं, जिससे न्याय की सुलभता बढ़ती है।
बाल विवाह मुक्त भारत और सरकारी योजनाओं पर जोर
प्राधिकार के सचिव रोहित श्रीवास्तव ने प्रशिक्षण के दौरान स्वयंसेवकों को नियमों के अंतर्गत हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।उन्होंने बताया कि पीएलवी का कार्य असहाय लोगों को न केवल न्याय दिलाना है, बल्कि उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में भी मदद करना है। सचिव द्वारा ‘सौ दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान’ के संबंध में भी स्वयंसेवकों को विस्तृत तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
विभिन्न विशेषज्ञों ने दिया प्रशिक्षण
प्रशिक्षण कार्यक्रम में कई विशेषज्ञों ने अपने-अपने क्षेत्रों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की:
प्रशिक्षक मंडल: प्रशिक्षक एडीसीपीयू शंभु कुमार रजक, सीडब्लूसी अध्यक्ष दीपक कुमार वर्मा, सीपीयू बबलु कुमार पाल, सीडब्लूसी सदस्य प्रमानंद मंडल, जीविका से चंदा कुमारी और मनोवैज्ञानिक शुभम कुमार ने विभिन्न विधिक व सामाजिक विषयों पर विस्तृत चर्चा की। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन एलएडीसीएस उमर फारूक द्वारा किया गया।
अगला सत्र 15 जनवरी को
इस पहले चरण में कुल 50 पारा विधिक स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित किया गया है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर विधिक जागरूकता को सुदृढ़ करना और जरूरतमंदों को न्याय प्रणाली से सीधे जोड़ना है। प्रशासन के अनुसार, शेष 50 स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण 15 जनवरी को आयोजित किया जाएगा।



