पूर्णिया: पटना के जदयू प्रदेश कार्यालय में आज कुछ अलग ही माहौल था। गर्मी के बावजूद भीड़ उमड़ी हुई थी, चेहरे पर उम्मीद की चमक और आँखों में समाधान की तलाश — क्योंकि लोगों को पता था, आज उनकी बात सुनी जाएगी। और तभी मंच पर पहुंचीं बिहार सरकार की कद्दावर नेता, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री माननीया लेशी सिंह। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित इस जनसुनवाई कार्यक्रम में जैसे ही मंत्री लेशी सिंह ने माइक संभाला, पूरा हॉल सन्नाटे में बदल गया — एक सन्नाटा, जिसमें लोग अपनी वर्षों पुरानी समस्याओं के समाधान की आहट सुन रहे थे।
लेशी सिंह न सिर्फ सुन रही थीं, वे हर शिकायत को नोट कर रहीं थीं, हर बात को समझ रही थीं और — चौंकाने वाली बात — तुरंत संबंधित अधिकारियों को फोन कर निर्देश भी दे रही थीं! “इस मामले में विलंब नहीं चलेगा… आज ही कार्रवाई हो,” — ऐसे तीखे और स्पष्ट शब्दों के साथ मंत्री जी ने यह साफ कर दिया कि यह कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि जनता से सीधा संवाद और तत्काल निवारण का वास्तविक मंच है।
पूर्णिया से लेकर पश्चिम चंपारण तक, सिवान से भागलपुर तक आए सैकड़ों कार्यकर्ता और नागरिक अपनी-अपनी समस्या लेकर पहुंचे थे। जमीन विवाद से लेकर राशन कार्ड, पेंशन, शिक्षा और विकास से जुड़ी समस्याएं — हर बात मंत्री जी ने खुद सुनी। कार्यकर्ताओं ने जब देखा कि उनकी वर्षों पुरानी फाइलें अब सीधे मंत्री के निर्देश से आगे बढ़ रही हैं, तो कई की आँखों में भावुकता थी… क्योंकि यह केवल सुनवाई नहीं थी — यह था एक भरोसे की वापसी।
लेशी सिंह ने न सिर्फ जनता की बात सुनी, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि जनता के प्रति जवाबदेही ही जनसेवा की असली पहचान है। आज की जनसुनवाई सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं था — यह लोकतंत्र की जीवंतता का प्रमाण था। और उस प्रमाण पर हस्ताक्षर किए मंत्री लेशी सिंह ने, अपने स्पष्ट, सख्त लेकिन संवेदनशील फैसलों के साथ।



