पटना/पूर्णिया: तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी डॉ. अभय नाथ सिंह ने एम्स पटना में विधायक चेतन आनंद, उनकी पत्नी डॉ. आरुषि और अन्य लोगों के साथ हुए दुर्व्यवहार पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे बेहद निंदनीय बताते हुए कहा कि जब आमजन की समस्याओं का समाधान सरकारी तंत्र नहीं कर पाता, तो वह थककर अपने जनप्रतिनिधि के पास जाता है, और जनप्रतिनिधि का यह दायित्व है कि वह जनता की सहायता करे।
डॉ. सिंह ने सवाल उठाया कि यदि सरकारी डॉक्टर अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करते, तो देश में इतने प्राइवेट अस्पतालों की भरमार नहीं होती। आज हालत यह है कि खुद मंत्री, सांसद और विधायक भी इलाज के लिए निजी अस्पतालों का रुख करते हैं — जबकि देश में सबसे अधिक खर्च स्वास्थ्य और शिक्षा पर ही हो रहा है। इसके बावजूद जनता की निर्भरता निजी संस्थानों पर बनी हुई है, जो कि गहरे चिंता का विषय है।
उन्होंने डॉक्टरों को भगवान का रूप मानने की परंपरा पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ डॉक्टर अब शैतान की भूमिका में दिख रहे हैं। एम्स पटना में हुई घटना के बाद हड़ताल को उन्होंने दबाव की राजनीति बताया और कहा कि जब निदेशक आपके ही हैं और जांच के आदेश दिए गए हैं, तो हड़ताल का औचित्य क्या है? इससे दूरदराज से आए गरीब मरीजों का इलाज ठप हो गया है, और डॉक्टरों की भूमिका ‘सेवक’ की जगह ‘गुंडई’ जैसी बनती जा रही है। डॉ. अभय नाथ सिंह ने यह भी कहा कि कभी मरीजों के परिजन, कभी पत्रकार और अब जनप्रतिनिधि तक अस्पताल में दुर्व्यवहार का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने सरकार, मीडिया और न्यायपालिका से आग्रह किया कि इस विषय पर गंभीरतापूर्वक विचार हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।



