पूर्णिया, अभय कुमार सिंह: रूपौली प्रखंड के टीकापटी थाना क्षेत्र के गोडियर बड़घरिया टोला गांव में उस वक्त कोहराम मच गया जब तमिलनाडु से एंबुलेंस में एक राजमिस्त्री का शव गांव पहुंचा। गांव के 40 वर्षीय गोलो महतो, जो अपनी बेटी कंचन की दिसंबर में होने वाली शादी के लिए कुछ पैसे कमाने के उद्देश्य से अपने बेटे मिथुन के साथ 15 जुलाई को तमिलनाडु गए थे, वहां 16 अगस्त को एक निर्माणाधीन भवन में प्लास्टर करते वक्त छत से गिर पड़े।
सिर में गंभीर चोट लगने के कारण अस्पताल में भर्ती तो हुए, परंतु इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। जैसे ही उनका शव गांव पहुंचा, पत्नी अनिता देवी, बेटा सिकंदर, बेटियां कंचन और गुलगुल शव से लिपटकर चीत्कार करने लगे। पूरे टोले में मातम का माहौल फैल गया। गांव के पूर्व सरपंच रामपुकार महतो और अन्य ग्रामीणों ने बताया कि यह परिवार बेहद गरीब है और जीवनयापन के लिए बाहर मजदूरी करना इनकी मजबूरी है।

बेटी की शादी को लेकर परिवार में उम्मीदें थीं, लेकिन अब सारे सपने राख हो गए। हर साल सैकड़ों मजदूर परदेश जाते हैं, लेकिन दर्जनों ऐसे भी होते हैं जिनकी घर वापसी कफन में लिपटी लाश के रूप में होती है। कई शव तो आर्थिक तंगी के कारण गांव तक नहीं लौट पाते। इस दर्दनाक घटना ने फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आजादी के 79 साल बाद भी गरीब मजदूरों के लिए कोई स्थायी समाधान क्यों नहीं निकला? सरकारें चुनाव में तो इनकी दुहाई देती हैं, मगर संकट की घड़ी में ये परिवार किसके सहारे जिएं? अब देखना है कि सरकार इस पीड़ित परिवार को राहत देती है या फिर यह भी सिर्फ एक खबर बनकर रह जाती है।



