पूर्णिया: बिहार के इतिहास में आज का दिन स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पूर्णिया की धरती से राज्य को ₹36,000 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं की सौगात दी। यह आयोजन न केवल पूर्णिया बल्कि पूरे सीमांचल और उत्तर बिहार के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बन गया है।
पूर्णिया एयरपोर्ट का लोकार्पण — अब उड़ानें होंगी सीधे
सबसे बहुप्रतीक्षित परियोजनाओं में शामिल पूर्णिया एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का लोकार्पण प्रधानमंत्री मोदी ने खुद किया। इसके साथ ही पूर्णिया से अहमदाबाद के लिए पहली वाणिज्यिक उड़ान रवाना हुई। 76-सीटर विमान ने उड़ान भरते ही सीमांचल के सपनों को नई ऊंचाई दे दी।
“पूर्णिया अब उड़ान भर रहा है। यह सिर्फ एयरपोर्ट नहीं, यह नए बिहार की उड़ान है,” प्रधानमंत्री मोदी ने उद्घाटन के बाद सभा को संबोधित करते हुए कहा।

विकास की बौछार: 36,000 करोड़ की परियोजनाएं
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में बताया कि बिहार को ₹36,000 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का तोहफा दिया जा रहा है, जिनमें शामिल हैं:
रेल परियोजनाएं: विक्रमशिला–कटारिया नई रेल लाइन का शिलान्यास, अररिया–गलगलिया रेलखंड का उद्घाटन
सड़क और आधारभूत संरचना परियोजनाएं
राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की स्थापना — जिससे कोसी और मिथिला क्षेत्र के किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
कई स्वास्थ्य, शिक्षा एवं सिंचाई योजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास
राजनीतिक संदेश: सीमांचल से चुनावी बिगुल
पूर्णिया की रैली केवल विकास की घोषणाओं तक सीमित नहीं रही। इस विशाल जनसभा को चुनावी अभियान की शुरुआत के रूप में भी देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्णिया की धरती से विपक्ष पर तीखे प्रहार किए और जनता से 2025 के चुनावों में “50 नहीं, 100 प्रतिशत सीटें” दिलाने की अपील की।
“बिहार अब जात-पात नहीं, विकास के नाम पर वोट करेगा,” – नरेंद्र मोदी
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी रहे साथ
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी ने भी सुर्खियां बटोरीं। लंबे समय बाद प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को एक मंच पर देखना राजनीतिक रूप से भी अहम रहा। दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से पूर्णिया को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की प्रतिबद्धता जताई।
पूर्णिया तैयार था — जनता उमड़ी जनसैलाब में
कार्यक्रम का आयोजन जीरो माइल (गुलाबबाग), शीशाबाड़ी एसएसबी कैम्प मैदान में किया गया, जहाँ लाखों की संख्या में लोग उपस्थित रहे। पूरे शहर में उत्सव जैसा माहौल रहा। सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए गए थे, साथ ही महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों के लिए विशेष व्यवस्थाएं भी थीं।
पूर्णिया का भविष्य अब उड़ान पर
यह दौरा केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं था, यह था पूर्णिया और पूरे सीमांचल के सपनों को उड़ान देने का दिन। हवाई सेवा, रेलवे, सड़क, मखाना उद्योग, स्वास्थ्य – हर क्षेत्र में नए द्वार खुलते दिखे।
अब पूर्णिया केवल बिहार का सीमावर्ती ज़िला नहीं, विकास का केंद्र बनकर उभर रहा है।




