पूर्णिया: बुधवार को खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग व सहकारिता विभाग की संयुक्त बैठक में पैक्सों को राहत देने वाले कई अहम फैसले लिए गए। पैक्सों की सबसे बड़ी मांग — धान अधिप्राप्ति के लिए दो महीने के बजाय छह महीने तक ब्याज-मुक्त कैश क्रेडिट लिमिट की सुविधा — पर खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेशी सिंह ने सकारात्मक आश्वासन देते हुए कहा कि इस प्रस्ताव पर शीघ्र आवश्यक निर्णय लिया जाएगा ताकि पैक्सों पर आर्थिक बोझ कम हो।
बैठक में पैक्स प्रतिनिधियों ने राइस मिलों की वास्तविक मिलिंग क्षमता की जांच और लंबित भुगतानों के तुरंत निपटारे की मांग रखी। मंत्री लेशी सिंह ने दोनों मांगों पर त्वरित कार्रवाई का भरोसा देते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि पैक्सों का कोई भी बकाया भुगतान लंबित न रहे और निर्धारित समय-सीमा में सभी भुगतान पूरे कर लिए जाएं।
सहकारिता मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार, खाद्य विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार, सहकारिता सचिव धर्मेन्द्र सिंह के अलावा बिहार राज्य खाद्य निगम के महाप्रबंधक (अधिप्राप्ति) रमेन्द्र कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में धान खरीद की मौजूदा स्थिति, चावल की गुणवत्ता और साधारण चावल को फोर्टिफाइड चावल में बदलने की पूरी प्रक्रिया पर भी विस्तृत चर्चा हुई। पैक्स प्रतिनिधियों ने बैठक के निर्णयों पर संतोष जताया है।

