PURNIA NEWS, अभय कुमार सिंह : कहते हैं नेता अगर वोट की राजनीति छोड दें, तो यह देश स्वर्ग बन जाएगा । कई ऐसे उदाहरण सामने आते रहते हैं, जिससे यह साबित होता है कि समाज में हर कोई शांति एवं भाईचारा में विश्वास करते हैं । इसी का उदाहरण हर समय देखा जा सकता है । वर्त्तमान में हमारा आस्था एवं पवित्रता का महापर्व छठ का बाजार लगा हुआ है, यह बाजार अधिकांश मुस्लिम भाई-बहनें मिलकर सजाते हैं । तब ऐसा लगता है कि इस दुनिया में ना तो कोई धर्म है और ना ही कोई जाति । अगर है तो बस मानवता एवं इनसानियत । जो छठ पर्व आस्था के साथ-साथ पवित्रता का महापर्व माना जाता है, वह पर्व तथाकथित नेताओं के अनुसार मुस्लिम एवं हिंदुओं कोे बांटकर अपना वोट बैंक हासिल करना चाहते हैं । आज इस रूपौली में अगर ये मुस्लिम भाई ना हों तो यह पर्व अधूरा रह जाये । बाजार या यूं कहें कि रूपौली मेला में घुसते ही ऐसा महसूस होने लगता है कि आखिर धर्म है कहां ।
यहां की लगभग दुकानों को मुस्लिम ही पूरी पवित्रता के साथ छठ बाजार सजाते हैं । हर हिंदू भाई- बहनों की भीड इनकी दुकानों के आगे इनसे छठ की सामग्री खरीदते हैं तथा मुस्लिम भाई – बहनें भी उतनी ही पवित्रता से उन्हें सामान सौंपते हैं । ये सारी दुकानें यहां के आझोकोपा, दरगाहा, रामपुर परिहट, बसगढा, चपहरी, बेला प्रसादी आदि गांवों के मुस्लिम भाई लगाते हैं । बाजार में उनके व्यवहार के छठीव्रती महिलाएं कायल हो जाती हैं तथा कहती हैं कि प्रेम और पवित्रता से बढकर कुछ नहीं है । बाजार आयीं छठब्रती महिला मंजुला देवी, सविता देवी, वीणा देवी, पारकली देवी, सविता देवी, डॉली देवी आदि कहती हैं कि जिस पवित्रता के साथ मुस्लिम भाई – बहनें उन्हें सामान सौंपते हैं, उससे तो ऐसा लगता है कि यहां सिर्फ मानवता है, ना कि जाति-धर्म । कितना खयाल रखते हैंे तथा अपने ईद की तरह वे छठ मां का उतना ही खयाल रखते हैं । दूसरी ओर इस छठ बाजार को सजानेवाले मो इसलाम, मो मोबीन, बीबी सकीना, बीबी रजिया आदि कहते हैं, उन्हें तो लगता ही नहीं है कि वे अलग-अलग हैं । अगर अलग-अलग होते तो वे क्यों इनके हर दुख-सुख में साथ होते । जिस प्रकार हमारा ईद है, उसी प्रकार छठ है । लोगों को इनसे सबक लेनी चाहिए कि किसी के बहकावे में आकर कभी मानवता को ना भूलें ।



